इस बात में तो कोई दो राय नहीं कि शिक्षा हमेंशा से महत्वपूर्ण रही है। देखा जाए तो शायद शिक्षा आदि काल से ही मनुष्य के लिए आवश्यक रही होगी। सोचिए इस आदि मानव की जिसने पहली बार अग्नि देव प्रसन्न किए होंगे। इस अद्भुत शिक्षा से उसे कितने आनंद की प्राप्ति हुई होगी। फिर आगे चल कर अपनी भारतीय संस्कृति में तो इस विषय पर सैंकड़ों श्रुतियाँ-श्लोक कहे गए हैं। पर कल और आज में शिक्षा के महत्व में कुछ परिवर्तन आया है या अभी भी इसका महत्व उतना ही है जितना कल था।

आगे पढ़े

रमण जी ने चमत्कारी अनुभव की गूँज कराके फिर से विचारों के दो राहे पर ला पटका है। एक तरफ विज्ञान-आभियांत्रिकी में शिक्षित दिमाग यह मानने को तैयार नहीं है कि ऐसी कोई चीज हो सकती है तो दूसरी तरफ दाँया मस्तिषक कहता है कि मूढ़ अगर तेरी सोच में कुछ बात नहीं बैठती तो जरुरी नहीं कि सत्य न हो। भाग्य कहें या दुर्भाग्य अपने साथ ऐसी बात कभी हुई नहीं। तो इसका ये मतलब नहीं कि भाई कुछ लिखेगा नहीं। आप को एक कथा सुनाते हैं। सुनी हो तो पढ़के माफ कर देना।

आगे पढ़े

जब अतुल ने जब अतुल ने का विषय रखा तो सोचा कि अच्छा है खूब लिखेंगे। पर जब लिखने बैठा तो पता लगा कि मैं जितना जानता हूँ सब मीडिया की दी हुई सोच है। कभी बिहार जाने का मौका नहीं लगा। जो पता था वह यह कि बड़े मसखरे किस्म के घाघ नेता हैं जोकि पता नहीं कितने सालों से बिहार पर अपना राज्य जमाए हुए हैं। येन केन प्रकारेण कुर्सी बचा के रखे हैं। गर किसी कंपनी को चलाने के लिए कोई मैनेजर चुनना होता है तो देखते हैं कि वह कम्पनी के हित में काम करेगा के नहीं, ऐसा न होने पर उसे बाहर की राह दिखा दी जाती है। नेता भी राज्य का हित जो कि जन हित में है के लिए चुने जाते हैं पर यहाँ तो स्वहित सबसे पहले होता है। खैर इतनी सीमित सोच के बाद सोचा कि जब खुद कुछ समझ न आए तो बड़े क्या कहते हैं इस बारे में पता करना चाहिए। इंद्र शर्मा जी बड़ी ही परिपक्व सोच के ऐसे ही व्यक्ति हैं। हिंदूस्तान मोटर्स से सेवानिवृत हो कर वे आजकल दृष्टिकोण नाम का चिट्ठा लिखते हैं। बड़ा उपयुक्त व मार्गदर्शक ब्लॉग है उनका। वहीं पर उन्होंने लालू जी को एक जब अतुल ने जब अतुल ने का विषय रखा तो सोचा कि अच्छा है खूब लिखेंगे। पर जब लिखने बैठा तो पता लगा कि मैं जितना जानता हूँ सब मीडिया की दी हुई सोच है। कभी बिहार जाने का मौका नहीं लगा। जो पता था वह यह कि बड़े मसखरे किस्म के घाघ नेता हैं जोकि पता नहीं कितने सालों से बिहार पर अपना राज्य जमाए हुए हैं। येन केन प्रकारेण कुर्सी बचा के रखे हैं। गर किसी कंपनी को चलाने के लिए कोई मैनेजर चुनना होता है तो देखते हैं कि वह कम्पनी के हित में काम करेगा के नहीं, ऐसा न होने पर उसे बाहर की राह दिखा दी जाती है। नेता भी राज्य का हित जो कि जन हित में है के लिए चुने जाते हैं पर यहाँ तो स्वहित सबसे पहले होता है। खैर इतनी सीमित सोच के बाद सोचा कि जब खुद कुछ समझ न आए तो बड़े क्या कहते हैं इस बारे में पता करना चाहिए। इंद्र शर्मा जी बड़ी ही परिपक्व सोच के ऐसे ही व्यक्ति हैं। हिंदूस्तान मोटर्स से सेवानिवृत हो कर वे आजकल दृष्टिकोण नाम का चिट्ठा लिखते हैं। बड़ा उपयुक्त व मार्गदर्शक ब्लॉग है उनका। वहीं पर उन्होंने लालू जी को एक लिखा था जिस का यहाँ हिंदी अनुवाद कर रहा हूँ। मैंने विभिन्न माध्यमों द्मारा यह अनुवाद करने के लिए उनकी अनुमति लेनी चाहि पर उनसे संपर्क न बन पाया। आशा है वे इसके लिए बुरा न मानेगे। एक और बात यह पत्र मई के महीने में लिखा गया था इसलिए कई चीजें बदल चुकी हैं।

प्रिय लालू जी बिहार के बेताज राजा

आगे पढ़े

संस्कृत में एक श्लोक है कि जब बाकी दुनिया अभी पेड़ों और जंगलों में ही रहती थी तब अपने यहाँ ऋषि-मुनि सभ्यता को विनाश से कैसे बचाया जाए के ऊपर पुस्तकें लिख रहे थे। अब वह पुस्तकें कौन सी हैं और इस में कितनी सच्चाई है यह तो बौद्धिक का विषय है। पर एक बात तो पक्की है कि अपन लोग काफी समय से ठलुआई कर रहे हैं। सर्वप्रचलित समय है 5000 वर्ष। यही मानकर भी देखें तो पिछलो हजार दो हजार सालों में क्या नहीं हुआ –

यूनान मिस्त्र रोमां सब मिट गए जहाँ से

कुछ बात है कि ऐसी हस्ती मिटती नहीं हमारी

तो वे कौन सी बातें हैं कि इस हस्ती को बरकरार रखे हूई हैं? मेरे हिसाब से यह हमारी संस्कृति ही होगी। आईए देखें कि वह क्या गुणसूत्र हैं कि हस्ती मिटती नहीं हमारी –

आगे पढ़े

अनुगूँज

भई वैसे तो पिछले [अनुगूँज

भई वैसे तो पिछले](http://hindi.pnarula.com/akshargram/2004/10/25/90/) की तिथि निकल चुकी है पर चिट्ठों की दुनिया का मजा ही ये है कि जब छपास पीड़ा हुई तुरंत निवारण कर लिया। तो नीरव जी ने जब पहले अनुगूँज का यह विषय रखा मन में बड़े विचार आए तो उन्हीं विचारों का ताना-बाना इस प्रविष्टि के तहत प्रस्तुत है। आशा है नीरव व देबाशीष देरी के लिए बुरा नहीं मानेंगे।

आगे पढ़े

Author's picture

पंकज नरूला

A Product Guy working in Cloud in particular SAP HANA Cloud Platform playing with Cloud Foundry + Subscription and Usage billing models

Product Management

San Francisco Bayarea