कॉलेज के जमाने में होस्टल की मैस में शनिवार को नाश्ते में मूली के पराँठे मिलते थे। उस समय दोस्तों से मजाक में कई बार इस बात पर मनन होता था कि यदि हम बहुत सारे पराँठे खा लें और इसके बाद जो होता है थोड़े थोड़े अंतराल पर होने की बजाए अगर एक सार एक के बाद एक हो तो क्या आदमी भागता नजर आएगा।

वह मजाक की बात थी लेकिन फ्राँस की एक कम्पनी ऐसा कर भी दिया है, न न आदमी पर नहीं बल्कि कार पर। कार के पेट में कम्प्रेस्ड हवा भरी होगी व गाड़ी इस हवा के फैलने से चलेगी। क्या मजेदार बात है। न कोई धूंआ न प्रदूषण। अधिक जानकारी आप एम डी आई कम्पनी के सजाल से पा सकते हैं। मजे की बात है कि टाटा वालों का इनके साथ अनुबन्ध भी है। अभी आप कह सकते हैं कि मेरी कार हवा से चलते हुए हवा से बातें करती है।

छवि साभार http://www.theaircar.com/models.html