ऊपर वाली छवि है टाईम्स ऑफ इंडिया के पुराने सजाल की। यह पन्ना प्रथम पृष्ठ होता था, टाईम्स ऑफ इंडिया को पढ़ने छोड़ने के कारणों में से बहुत बड़ा कारण इनका यह थीम भी था। जब भी इसे देखता रक्तचाप बढ़ जाता, दिल धौकनी की तरह भागता। यदि आप अभी भी यह देखना चाहते हैं तो इस कड़ी पर क्लिकावें। 

खैर आज कल नव-सृजन की बातें होती हैं। टी ओ आई की वेब टीम का बल्ब भी जला व उन्होंने एकदम चकाचक रंगरोगन करके नए अभिकल्प (थीम) के साथ सजाल निकाला है जो कि वाकई काबिले तारीफ है। जरा एक नजर फरमाईए

यदि आप भी मेरी तरह इस साजो-सज्जा में रूचि रखते हैं (जैसे कि बैंगाणी बंधू) तो आप देखेंगे कि

  1. थीम में सफेद रंग की बहुलता है जो कि इसे वेब 2.0 वाली सजावट देता है।
  2. पार्शव सफेद होने से बाकी सारी सामग्री उभर कर आती है
  3. सारी जगह के उपयोग के लिए फ्लुइड खाके का प्रयोग किया गया है
  4. नीले रंग में मुख्य समाचार बढ़िया लग रहे हैं व कम्पयूटर स्क्रीन के लिए अच्छा है
  5. समाचार/विज्ञापन अनुपात ज्यादा है यानि कि ज्यादा खबरें कम विज्ञापन

अगर कम शब्दों में कहें तो बहुत सुंदर अभिकल्प है व वेब-टीम बधाई की पात्र है। साथ ही मैनेजमैंट की भी दाद देनी होगी जिन्होंने कम विज्ञापन वाले अभिकल्प को बनने दिया। कुछ समय पहले न्यूयार्क टाईम्स ने भी अपना स्वरुप बदला था व यह काफी चर्चा में रहा था। उस समय जिन बातों का ध्यान रखा गया था लहभग सभी यहां नजर आती हैं। इस बारे में अनिल डैश ने व न्यूयार्क टाईम्स के नए रंगरोगन मैनेजर ने यहाँ लिखा था  

जाते जाते मिर्ची सेठ स्पेशल जरा नीचे दी गइ वाशिंगटन पोस्ट की छवि पर निगाह डालिए लगता है टी ओ आई वालों की प्रेरणा में यह रही होगी

बोनस बात श्याम बाबू ने भी इस बारे में लिखा था व वहां से पता चला कि सभी बिरादरी वालों टी ओ आई, एच टी, एन डी टी वी, व इंडियन एक्सप्रैस सभी ने नया स्वरूप अपनाया है। सबसे घटिया बात हिन्दूस्तान टाईम्स वालों ने न्यूयार्क टाईम्स वालों की पूरी की पूरी कापी मार दी है।