ब्लॉग का नाम रखा मिर्ची सेठ पर बीते कुछ सालों में लगने लगा कि सेठ वाला काम नहीं कर रहा हूँ। दरअसल नौकरी करते करते कभी इस बात पर ध्यान ही नहीं गया कि वित्त प्रबंधन भी करना चाहिए। हमेशा से मन बना रहा कि देश वापिस जाना है इसलिए पैसा सारा हाथ में होना चाहिए कि जब मन करा जो थोड़ा बहुत सामान है बेच कर बैंक से पैसा निकाल कर जहाज का पंछी वापिस जहाज पर उड़ चलेगा। न तो कभी टैक्स बचाने के तरीकों पर ध्यान दिया और न ही कभी पैसा कहीं और लगाने की सोची। जो भी थोड़ा बहुत बचता था वह बैंक में चेकिंग (करंट) खाते में चला जाता था। यहां तो ब्याज इतना कम है कि वह पैसा बस उतना ही रहता था।

फिर पिछले साल मेरा एक दोस्त, उनकी बीवी, मेरी बीवी व मैं पैसे लुटा कर मजे लेने के लिए लॉस वेगास गए। सैन होज़े से वहां जाने के लिए किराए की फोर्ड एक्सपलोरर कर ली थी। रास्ता लंबा था इसलिए बातें करने का काफी समय था। मैं मेरा दोस्त आगे आदमियों वाली फालतु बातें यानि पैसा, टेक्नॉलजी, क्रिकेट पर बातें कर रहे थे। जबकि लड़कियाँ पीछे जिंदगी के बेहतर पहलुओं जैसे खाना, मेक अप, शॉपिंग इत्यादि पर बात चीत कर रही थी। बातों बातों में मैंने अपनी बचत कर व रजाई में जमा कर वाली वित्त नीति के बारे में बताया तो दोस्त आग बबूला हो गया। उसका एक्सलेटर पर पांव का दबाव भी बढ़ गया व बोला कि दोस्त जब तक पैसा आप के लिए काम नहीं करता तो आप महामूर्ख हो। दो बात शुरु हुई कि इस स्थिति से कैसे निकला जाए। मेरे लिए काफी रणनीति निर्धारित की गई। पहली थी की यदि कैश की अगले कुछ सालों में जरुरत नहीं है तो इसकी पोजीशन कम की जाए और कम से कम INGDirect जो कि 3.80% की दर पर ब्याज देता है वहां रखा जाए। और भी बहुत बाते हुई।

उस समय से जो एक बात मैंने शुरु की वह थी कि अपनी नेट वरथ यानि कुल जमा पूंजी व हर महीने की पूंजी-प्रवाह तालिका बनाना। इस काम के लिए मैं एक्सल का प्रयोग करता हूँ। यदि आप के पास एक्सल नहीं है तो आप ओपन-ऑफिस का केल्क भी प्रयोग कर सकते हैं। अब तो स्प्रेडशीट का अंतर्जाल संस्करण भी है। नमसम से आप इंटरनेट पर भी यही काम कर सकते हैं। मैंने इसका एक उदाहरण [ब्लॉग का नाम रखा मिर्ची सेठ पर बीते कुछ सालों में लगने लगा कि सेठ वाला काम नहीं कर रहा हूँ। दरअसल नौकरी करते करते कभी इस बात पर ध्यान ही नहीं गया कि वित्त प्रबंधन भी करना चाहिए। हमेशा से मन बना रहा कि देश वापिस जाना है इसलिए पैसा सारा हाथ में होना चाहिए कि जब मन करा जो थोड़ा बहुत सामान है बेच कर बैंक से पैसा निकाल कर जहाज का पंछी वापिस जहाज पर उड़ चलेगा। न तो कभी टैक्स बचाने के तरीकों पर ध्यान दिया और न ही कभी पैसा कहीं और लगाने की सोची। जो भी थोड़ा बहुत बचता था वह बैंक में चेकिंग (करंट) खाते में चला जाता था। यहां तो ब्याज इतना कम है कि वह पैसा बस उतना ही रहता था।

फिर पिछले साल मेरा एक दोस्त, उनकी बीवी, मेरी बीवी व मैं पैसे लुटा कर मजे लेने के लिए लॉस वेगास गए। सैन होज़े से वहां जाने के लिए किराए की फोर्ड एक्सपलोरर कर ली थी। रास्ता लंबा था इसलिए बातें करने का काफी समय था। मैं मेरा दोस्त आगे आदमियों वाली फालतु बातें यानि पैसा, टेक्नॉलजी, क्रिकेट पर बातें कर रहे थे। जबकि लड़कियाँ पीछे जिंदगी के बेहतर पहलुओं जैसे खाना, मेक अप, शॉपिंग इत्यादि पर बात चीत कर रही थी। बातों बातों में मैंने अपनी बचत कर व रजाई में जमा कर वाली वित्त नीति के बारे में बताया तो दोस्त आग बबूला हो गया। उसका एक्सलेटर पर पांव का दबाव भी बढ़ गया व बोला कि दोस्त जब तक पैसा आप के लिए काम नहीं करता तो आप महामूर्ख हो। दो बात शुरु हुई कि इस स्थिति से कैसे निकला जाए। मेरे लिए काफी रणनीति निर्धारित की गई। पहली थी की यदि कैश की अगले कुछ सालों में जरुरत नहीं है तो इसकी पोजीशन कम की जाए और कम से कम INGDirect जो कि 3.80% की दर पर ब्याज देता है वहां रखा जाए। और भी बहुत बाते हुई।

उस समय से जो एक बात मैंने शुरु की वह थी कि अपनी नेट वरथ यानि कुल जमा पूंजी व हर महीने की पूंजी-प्रवाह तालिका बनाना। इस काम के लिए मैं एक्सल का प्रयोग करता हूँ। यदि आप के पास एक्सल नहीं है तो आप ओपन-ऑफिस का केल्क भी प्रयोग कर सकते हैं। अब तो स्प्रेडशीट का अंतर्जाल संस्करण भी है। नमसम से आप इंटरनेट पर भी यही काम कर सकते हैं। मैंने इसका एक उदाहरण](http://numsum.com/spreadsheet/show/12774) बनाया है, ऑनलाइन देखें या फिर स्क्रीनशॉट नीचे हाजिर है

खैर अब धीरे धीरे थोड़ा बहुत निजी वित्त प्रबंधन के बारे में समझना लगा हूँ। कल बिज़नेस-वीक इस हफ्ते का संस्करण आया तो पता चला की बहुत से ब्लॉग बंधूओं ने अपने पूरे के पूरे वित्त प्रबंधन का अंतर्जाल पर ब्लॉग के जरिए खोल रखा है। इनमें अग्रणी है श्री पिंग। वे अभी अगले कुछ महीनों में अपना १००,००० डॉलर का गोल पूरा करना चाहते हैं व ४५की उमर तक एक मिलियन डॉलर के स्वामी बनना चाहते हैं। उनके ब्लॉग माई-मनी-ब्लॉग पर जाकर आप इस बारे में पूरा पढ़ सकते हैं। ब्लॉगरों की इस पूरी जमात के बारे में पढ़ने के लिए बिज़नेस-वीक पर यह लेख पढ़ें।