लोजी एक और नई पहल, खाली दिमाग शैतान का घर। पिनक पिनक में हिन्दी चिट्ठों की पहली बोलती प्रविष्टि कर रहा हूँ। ख्याल नया नहीं है, ब्रिज जी भी कह चुके हैं कि सजाल पर गर कविताएं हिन्दी में बोलती पड़ी हों तो क्या बात है। नया प्रयास है जरा मुहब्बत से सुनिएगा। कड़ी नीचे दी गई है।

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मेरी आवाज सुनो](http://pnarula.com/media/audio/pehli-aawaaz.mp3)