सुरेन्द्र मोहन पाठक मेरे प्रिय लेखक रहे हैं। पुरु जी का अंतर्जाल पर प्रकाशित होता कड़ी वार नावल पढ़ना शुरु किया तो पता नहीं किस कनेकश्न के चलते पाठक जी की लेखन शैली याद आ गई। ईमेल पर भाई लोगों से बात शुरु हुई तो पता चला कि सुरेन्द्र मोहन पाठक मेरे प्रिय लेखक रहे हैं। पुरु जी का अंतर्जाल पर प्रकाशित होता कड़ी वार नावल पढ़ना शुरु किया तो पता नहीं किस कनेकश्न के चलते पाठक जी की लेखन शैली याद आ गई। ईमेल पर भाई लोगों से बात शुरु हुई तो पता चला कि जी भी उनके बहुत बड़े पंखे हैं। एक पंखे को दूसरे पंखे की खबर मिली अच्छा लगा। इसी बीच पता चला कि जीतू भाई कुवैत वाले भी हिन्दी नावलों के बड़े फैन हैं। तो कहीं ऐसा तो नहीं कि यह बिमारी चिट्ठाकारों में कॉमन है। कोई नहीं अब बात चली है तो पाठक जी के पात्रों से आपका परिचय कराते हैं

मुख्य पात्र

सुनील चक्रवर्ती एक खोजी पत्रकार। इमानदार, मेहनती और वैरी कूल किस्म का इन्सान। टीवी सीरियल रिपोटर इसी से प्रभावित था।

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सुधीर कोहली द लक्की बास्टर्**ड, प्राइवेट जासूस, एक नम्बर को बिगड़ा हुआ इन्सान जिसका मानना है कि अगर कोई लड़की बिगड़ी है तो उसे पूरी तरह से बिगाड़ कर आगे तक पहुँचा के आएगा। सुधीर का ऐसा होने के पीछे कारण है उसकी निम्फोमैनियाक बीवी। शरीफ लड़कियों की बहुत कद्र करता है जैसे की उसकी अपनी सेक्रेट्री रजनी।

सोहल - दसियों नामों से जाना वाला शख्स जिसके पीछे कितने ही राज्यों की पुलिस लगी है। पर असल में सोहल एक बड़ा ही नेक पर चट्टान से भी दृढ़ निश्चय वाला वक्त का मारा इन्सान है जिसे समय की मार ने ऐसा बना दिया है। यह पाठक जी का सबसे मशहूर व मुश्किल किरदार है। सोहल सिक्ख होते हुए गुरबाणी बहुत याद करता है जैसे तू मेरे राखा सभनी थांई, तेरा भाणा मीठा लागे, जो तुद भावे नानका इत्यादि।

जीता - एक अनपढ़ आदमी जो एक लड़की के प्यार में पैसे के लिए कितने ही गुनाह करता है। वो भी वह लड़की जो किसी ओर से शादी कर चुकी है।

अन्य महत्वपूर्ण पात्र

रमाकांत - सुनील का शराबी दोस्त जो कि एक पब चलाता है वा गाहे बेगाहे सुनील के बहुत काम आता है। गालियाँ इनकी जुबान पर बैठती हैं यही साहब हैं जिनकी वजह से जीतू जी पाठक से खफा हैं। पर भैया हम तो मानते हैं कि रमाकांत से नावल में दिलचस्पी भी आती है। पंजाबी की उक्तियाँ भी इन्हें बड़ी आती है जैसे जुलाहे दियाँ मसखरियाँ मां भैणां नाल, यार नाल बहारां मेले मित्रां दे। इन्हीं का कहना है कि काफी हमेशा तड़का लगा कर यानि कि विहस्की मिला कर पीनी चाहिए। जानी वाकर ब्लैक लेबल को ये साहब अमरीक सिंह काला बिल्ला, डेड्स फेवरिट को भापे दी पसंद कहते हैं।

इंस्पेक्टर प्रभूदयाल सुनील का जानकार इंस्पेक्टर जिस की बहुत सारी लड़कियां हैं। रिश्वत तो इंस्पेक्टर साहिब खा लेते हैं पर कभी गरीबमार नहीं करते।“कृप्या नीचे नितिन जी की टिप्पणी देखें” अपने काम में भी उस्ताद हैं।

रजनी - सुधीर कोहली की हसीन जहीन सेक्रट्री जिस पर कोहली साहिब जान देते हैं पर रजनी सी लाईन नहीं देती। कोहली साहिब के सारी बहनजीयों की खबर भी मोहतरमा रखती हैं।

नीलम - पेशे से एक कॉलगर्ल थी जो कि मजबूरियों के चलते ऐसे बनी। पर सोहल से संपर्क में आ कर उससे इतनी वफा निभाई कि सोहल ने उससे शादी की व सोहल नीलम के साथ के सामान्य जिंदगी बीताने के सपने देखने लगा।