यह शेर मुझे बहुत अच्छा लगता है पर हमेंशा भूल जाता हूँ। शायर का पता नहीं पर गालिब भी हो सकते हैं। शेर है

मुल्ला गर असर है दूआ में

तो मस्जिद हिला के दिखा

गर नहीं, दो घूँट पी

और मस्जिद को हिलता देख