आज अजय देवगन और ऐश्वर्या राय की रेनकोट देखी उसी के गाने के बोल शीर्षक में लिखे हैं। पर यह प्रविष्टि फिल्म के बारे में न हो कर, फिल्म की डीवीडी पर लिखी एक पंक्ति के बारे में है। पंक्ति कुछ ऐसे थी वह एक छोटे से गाँव से कलकत्ता के बड़े शहर में बड़ी उम्मीद ले कर आया था। बाद अजय की हो रही है जो गाँव में काम से बेकार हो गया है। इस छोटे गाँव या शहर से बड़े शहर के पलायन पर ही कुछ दिन पहले ब्रिज जी से बात हो रही थी। मुद्दा उन्हों ने ही उठाया कि अपने यहाँ ये बहुत है कि जिंदगी में कुछ करना हो बस दिल्ली, मुम्बई, कलकत्ता, चेनई या बैंगलोर भागो। क्या अपने शहर गाँव में बैठे कुछ नहीं हो सकता। क्यूँ है कि जीतू जी कानपुर से कुवैत में और मैं अम्बाला से सैन होज़े में बैठा हूआ हूँ। क्या हम इंटरनेट व नई तकनीको से ऐसे पलायन कम कर सकते हैं??