मेरे कॉलेज के समय के दोस्त के छोटे भाई की सैक्रामैण्टो में सिक्खी रिवाज से गुरुद्मारे में आनंद काज यानि शादी थी। रमण जी ने कंप्यूटर पर गुरबानी की बात की तो याद आ गई। शादी जिस गुरुद्मारे में थी वाकई हाईटेक था। ग्रंथ साहिब जी के दोनों तरफ दो बड़े बड़े पर्दे थे जिन पर गुरबानी प्रोजेक्ट की जा रही थी। सबसे ऊपर गुरमुखी, फिर अंग्रेजी अनुवाद और फिर अंग्रेजी में पंजाबी उच्चारण। वाकई काबिले गौर था। आप भी देखिए

पहली लाव

यह पहली लाव या फेरे की स्लाइड है। यहाँ एक मजेदार वाक्या हुआ था। पहले फेरे के बाद जब दुल्हा दुल्हन बैठने लगे तो बीच में दुप्पटे के बंधन के अटकने की वजह से दुल्हे को दुल्हन का पूरा चक्कर ले कर बैठना पड़ा। सभी की हंसी छूट गई। कहने वालों ने कहा

काका तेरी तां पहले फेरे विच ही घुमकेरी घुम गी, अग्गे अग्गे वेखीं की हुंदा है।