आज कल उत्तर भारत में आप को लोग विभिन्न व्यक्तियों को सर से संबोधित करते हुए देखेंगे। मेरे सिंगापुर निवासी परममित्र निखिल गोयल को इस बात से खासी शिकायत है। उनकी शिकायत ये है कि सर संबोधन से आपको दुकानों के सेल्समैन आदि ही बुलाते हैं और यह संबोधन भी आपको तब मिलता है जब आपने अच्छी कमीजं पैंट पहन रखी हो। सामान्य कपड़ों में वही सेल्समैन आप से यह संबोधन छीन लेगा। लेकिन मेरी इस भारत यात्रा के दौरान मैंनें सर और सर जी का प्रचलन इतना ज्यादा पाया कि लगता है की यह हिन्दी का ही शब्द है। मेरे साले साहिब मुझे कभी कभी जीजू कहने की बजाय सर कह देते हैं। कार्यालयों में बाबू एक दूसरे को “अरे साहब क्या बात है” की जगह “अरे सर क्या बात है” कहते हैं। तो हम भी भैया कहते हैं सर जी क्या बात है।