संजय ने कुछ समय पहले शुद्ध हिन्दी के बारे में लिखा तो मन में एक साथ बहुत सारे प्रश्न आ गए । मैं समझता हूँ वे तो केवल व्यंग्य ही कर रहे थे । पर मैं “लोहपथगामिनी” एवं ”पवनठूसर” जैसे शब्दों की सार्थकता जानना चाहूँगा । भाषा की सुन्दरता व स्वच्छता तो बिल्कुल सही हैं पर उस के लिए अच्छे भले प्रचलित शब्दों को छोङ कर नए मुश्किल शब्द इजाद करना क्या ठीक है । जिनके अच्छे समान अर्थ हैं उन्हें अपनाओ बाकियों का सीधे प्रयोग किया जा सकता है । जैसे vector quantities के लिए सदिश राशियाँ email के लिए विपत्र आदि । रेल, पैन्सिल, स्टेशन के लिए नए शब्दों की क्या आवश्यकता है ।