भारतीय समाज में विद्या की महत्ता के बारे में यदि सोचा जाए तो आप पाएंगे कि विद्या सर्वोपरि मानी जाती है। भारतीय समाज में विद्या की महत्ता के बारे में यदि सोचा जाए तो आप पाएंगे कि विद्या सर्वोपरि मानी जाती है। जालस्थल पर दिए गया श्लोक इसी बात की ओर संकेत करता है। श्लोक है

न चोरहार्यं न च राजहार्यं न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि ।

व्यये कृते वर्धत एव नित्यं विद्याधनं सर्वधनप्रधानं ।।

अर्थात न तो इसे चोर चुरा सकते हैं और न ही राजा इसे आप से छीन सकता है। इसे भाईयों में बांटा नहीं जा सकता और न ही ये कंधों पर भारी होती है। अपितु इसे खर्च करने पर ये हमेंशा पढ़ती रहती है। सच में विद्या धन ही सर्वोपरि है।

लिखते लिखते एक फिल्म का वाक्या याद आ गया जोकि बिल्कुल यही कहता है। फिल्म का नाम है “द कांउड ऑफ मोन्टो क्रिस्टो” । कांउट को कैदखाने में डाल दिया गया है जहाँ से सिर्फ मौत ही अकेला रास्ता है। एक दिन उसकी कालकोठरी के फर्श से एक सफेद दाढ़ी वाला आदमी सुरंग खोदता हुआ निकलता है। वह बताता है कि वह पिछले कई वर्षों से यह सुरंग खोद रहा था लेकिन समुंद्र की बजाय कांउट की कोठरी की तरफ खोद दी। अगर काउंट उसकी मदद करे तो वह उसे इनाम देगा। इस पर कांउट ने कहा क्या इनाम, क्या मेरी आजादी? तो सफेद दाढ़ी वाले ने कहा आजादी, अरे वह तो छीनी जा सकती है और कांउट खुद उसका उदाहरण है। वह उसे दुनिया के सबसे अच्छे उपहार, विद्या का इनाम देगा।