कहानियाँ किसे अच्छी नहीं लगती और गर प्रेमचंद सरीखे कहानीकार की हों तो सोने पे सुहागा। घूमते घूमते गूगल भैया ने “द्वारे द्वारे ज्ञान संपदा” पर ला पटका। पटका तो पटका बस यहीं के हो कर रह गए। यह जालस्थल प्रसिद्ध कहानीकारों, उपन्यासकारों की रचनाओं का जमावड़ा है। ज्यादातर रचनाएं प्रेमचंद, एवं यशपाल जी की हैं। आजकल प्रेमचंद जी की कहानीयों की किताब नरक का मार्ग पढ़ रहा हूँ। गर किसी ने सरल हिन्दी कैसे लिखी जाए पता करना हो तो प्रेमचंद पढ़े।

द्वारे द्वारे ज्ञान संपदा पर पुस्कतें विभिन्न प्रारूपों(फारमेट्स) में हैं। मैं Word प्रारूप को थोड़ा अपने हिसाब से बदलकर प्रयोग कर रहा हूँ। कुछ लिपि का आकार छोटा किया और थोड़ा पृष्ठ-विन्यास को दो कॉलम का किया ताकि थोड़ा रफतार से पढ़ा जा सके। उदाहरण के लिए छवि नीचे दे रहा हूँ-

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