बड़ी सिरदर्दी और मगजमारी के बाद आखिरकार सामान्य से 300 डॉलर ज्यादा पर चाइना ईस्टर्न एयरलाइन(China Eastern Airlines) पर टिकटें मिल ही गई। एक तो मंहगी थी ऊपर से एक ज्यादा कनैक्शन भी था। सामान्यतः कोई भी एयरलाइन भारत पहुँचाने के लिए एक कनैक्शन लेती है जैसे कि सैन फ्राँसिस्को – फ्रैंरफर्ट – दिल्ली या सैन फ्राँसिस्को – पैरिस – दिल्ली पर इसके लिए हमारा रास्ता था सैन फ्राँसिस्को – लॉस एंजेल्स – शंघाई – दिल्ली। एक तो ये चाइना ईस्टर्न एयरलाइन का नाम किसी ने नहीं सुना था ऊपर से ये एक अधिक कनैक्शन भी जान ले रहा था। साथ ही फलाईट पर खाने को क्या मिलेगा सोच कर भी डर लग रहा था। आखिरकार बुधवार हमलोग सैन डिएगो से रात के नौ बजे निकले। सारी रात ड्राइव करके सैन होज़े जाना था। सफर बढ़िया रहा, वसुधा ने भी दो घंटे गाड़ी चलाई जिस दौरान मैं कुछ सुस्ता लिया। हम दोनों कि यह पहली सम्पूर्ण रात्रि ड्राइव थी। वीरवार सैन होज़े में बिताने के बाद हमलोग शुक्रवार की सुबह पाँच बजे उठ गए। साढे आठ बजे की सैन फ्राँसिस्को से लॉस एंजेल्स फलाईट के लिए हम करीब छः बजे एअरपोर्ट पर पहुँच कर लाइन में लग गए। सत्तर- सत्तर पाँउड के दो सूटकेस जमा कराए। पता चला कि शंघाई का बोर्डिंग पास या सीट नंबर लॉस एंजेल्स से मिलेगा मतलब फिर से लाइन में लगना। हाय री किस्मत सिंगापुर या लुफ्तांसा जैसी एअरलाइनों पर देश जाते हुए सैन फ्रांसिस्को से सारे बोर्डिंग पास लो और सारे रास्ते कुछ करने की जररुत नहीं। खैर अब समय ने इस ओखली में हमारा सिर दे ही मारा है तो देखते हैं कौन कौन से ऊसल सिर पर पड़ते हैं।

लॉस एंजेल्स में हम लोग जिस टर्मिनल पर उतरे वहाँ से अंतरराष्ट्रीय उड़ाने नहीं जाती थी। अंतरराष्ट्रीय अड्डे के लिए बाहर निकल कर चल कर जाना पड़ा। यहीं से हमारी दुश्वारियों के सिलसिले शुरु हो गए। बोर्डिंग पास के लिए लाइन में भी लग गए। यहाँ बड़ा ही बेतरतीबी का आलम था। लाइन में दूसरा नंबर होने के बाद भी एक घंटा प्रतीक्षा करनी पड़ी। एयरलाइन वाले 11:30 की उड़ान के लिए 11:15 तक यात्री स्वीकार करते रहे। और हम जैसे 1:30 बजे की उड़ान वाले जोकि समय पर आ गए थे अपने आप को कोसते रहे। प्रतीक्षा करते करते एक ऐसी विस्फोटक बात पता चली जिसके बाद सारी जिंदगी इस एअरलाइन से सफर न करने की कसम खा ली साथ ही सारे दोस्तों को भी भविष्य में इस एअरलाइन से दूर रहने की सलाह दे दी। बात ये पता चली कि हम लोगों को शंघाई में उतर कर अपना सामान क्लैम करना होगा और फिर से दिल्ली के लिए बोर्डिंग पास की लाइन में लगते हुए जमा करना होगा। अच्छी एअरलाइन जहां से आप यात्रा आरंभ कर रहे हैं पर सामान जमा कराओ और गंतव्य पर जा कर ले लो। यहाँ एक तो ज्यादा कनैक्शन है, फिर हर एक रुकने वाले एअरपोर्ट पर बोर्डिंग पास के लिए लाइन में लगो और अपने भारी भारी सूटकेसों को ढेलते फिरो। खैर शंघाई तक के पग के लिए बोर्डिंग पास ले कर डिपारचर गेट पर खड़े हो गए। यहाँ भी चाइना ईस्टर्न एयरलाइन(China Eastern Airlines) वाले अपनी हरकतों से बाज नहीं आए। 1:30 की उड़ान की बोर्डिंग 2:00 बजे आरंभ हुई यात्रियों को डी टी सी स्टाईल बसों में भेड़ बकरियो की तरह भर कर प्लेन की तरफ ले गए। गनीमत थी कि प्लेन अंदर से अच्छा था और कुछ देर में खाना भी अच्छा मिला रेडीमेड रोटी, भिंडी और चन्ने की सब्जी। एक औऱ अच्छी बात हुई कि हर सीट पर बिजली का कनैक्शन था जिस वजह से नोटबुक को सारा समय चला सकता हुँ। यह प्रविष्टि लिखते हुए एक घंटा कैसे बीत गया पता न चला। फलाईट वाले टीवी पर चीनी प्रोग्राम देख कर तो समय उल्टा लंबा लग रहा था। शंघाई में क्या हुआ अगली प्रविष्टि में लिखुंगा। जाते जाते यदि आप किसी और एयरलाइन में जा सकते हैं तो उस में जाँए पर चाइना ईस्टर्न एयरलाइन में कोई पैसे भी दे तब भी ना कर दें।