याद नहीं चिट्ठाकारी की दुनिया में कदम कैसे रखे । शायद जॉन ऊडॅल का रेडिया मैंने सबसे पहले पढ़ा होगा । जावा से रोज़ी रोटी चलती है, इसलिए jroller.com पढ़ना शुरू हो गया । वहाँ एक ब्लॉग towards more light… लिखना आरंभ किया लेकिन वहाँ पूर्णतयः जावा केंद्रित होने के कारण निरंतरता नहीं बन पाई । इसी बीच गूगल भैया ने आलोक जी के चिट्ठे पर पटक कर हिंदी चिट्ठीकारिता से परिचित कराया और हाँ भाई का जन्म हुआ । तो ये हुआ गोपाल का आना । अब इस सभी के दौरान जो चीज़ मैंने स्थाई देखी है वह है ज्यादातर व्यक्तिगत चिट्ठे मूवेबल टाईप से बनाए जाते हैं । और जब व्यास जी ने घोषित किया कि वे ब्लॉगस्पॉट से पलायन कर mblogs.com पर आशियाना बना रहे हैं तो दिल ने कहा कि देखें यह क्या बला है । व्यास जी जैसे अति-बुद्धिमानी पुरुष नाहक ही ब्लॉगस्पॉट का दिल न तोड़ेंगे । और जब mblogs को परखा तो पाया कि वे आज के युग की सर्वगुण-संपन्न ब्लॉगकन्या हैं । मैंने भी इन से दोस्ती करने का प्रण किया । mblogs भी मूवेबल टाईप पर आधारित है । मूवेबल टाईप के हिंदी अनुवाद की कोशिश नेटअहोय, आलोक जी, एवं अरनब कर चुके हैं, मैं भी कुछ ऐसा करने की कोशिश कर रहा हूँ । संभवतः न्यूटन की बरसी यानि 20 मार्च तक संपूर्ण हो जानी चाहिए ।