भई net पर बहुत खरबूज़े हैं और खरबूज़े को देख कर खरबूज़ा रंग ना बदले ये तो हो ही नहीं सकता । तो हमने भी बिरादरी भाईयों को देख कर ब्लोग लिखना शुरू कर दिया । हनुमान जी के एक भगत ने बड़ा सुन्दर program तख्ती लिखा हुआ था बड़ा काम आया । आखिरी बार तख्ती चौथी कक्षा में लिखी थी (१९८३-१९८४) । वो भी सही दिन थे खड़िया से सुबह सुबह तख्ती पोत कर स्कूल जाते जाते तख्ती का सूखाना । फिर काली स्याही व कलम से सुन्दर सुन्दर लिखना । आज कल तो अच्छा फोन्ट देखते हैं ।