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	<title>Comments for मिर्ची सेठ</title>
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	<description>मिर्ची सी जिंदगी, कभी मंदी कभी तेज</description>
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		<title>Comment on मैं कौन हूँ by Vinod</title>
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		<dc:creator>Vinod</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Feb 2010 08:16:44 +0000</pubDate>
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		<description>अगर आप सचमुच यह जानना चाहते हैं की &quot; मैं कौन हूँ ? &quot; तो मैं आपकी मदद कर सकता हूँ।


मैनें आपके प्रशन &#039; मैं कौन हूँ ? &quot; के उत्तर अपने ब्लॉग http://mainhoshhoon.blogspot.com/ पर दिए हैं।


अगर फिर भी आप संतुष्ट न हों तो मुझे kad.vinod@gmail.com पर और सवाल पूछ सकते हैं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अगर आप सचमुच यह जानना चाहते हैं की &#8221; मैं कौन हूँ ? &#8221; तो मैं आपकी मदद कर सकता हूँ।</p>
<p>मैनें आपके प्रशन &#8216; मैं कौन हूँ ? &#8221; के उत्तर अपने ब्लॉग <a href="http://mainhoshhoon.blogspot.com/" rel="nofollow">http://mainhoshhoon.blogspot.com/</a> पर दिए हैं।</p>
<p>अगर फिर भी आप संतुष्ट न हों तो मुझे <a href="mailto:kad.vinod@gmail.com">kad.vinod@gmail.com</a> पर और सवाल पूछ सकते हैं।</p>
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		<title>Comment on सृष्टि का कौन है कर्ता by Sushant Pandit</title>
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		<dc:creator>Sushant Pandit</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Dec 2009 15:16:41 +0000</pubDate>
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		<description>Aapka yeh webpage bahut gyanmay hei. Meri jigyansa Bharatiya sabhyata aur dharm aaramv hui Nasadiya sukta se hi. Iss sukta mein choopa hei &#039;amartya&#039; amrit. Dhanyavad.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Aapka yeh webpage bahut gyanmay hei. Meri jigyansa Bharatiya sabhyata aur dharm aaramv hui Nasadiya sukta se hi. Iss sukta mein choopa hei &#8216;amartya&#8217; amrit. Dhanyavad.</p>
]]></content:encoded>
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	<item>
		<title>Comment on कम्पयूटर पर हिन्दी कैसे लिखें &#8211; अब वीडियो में by अथ श्री पॉडकास्टिंग महापुराण &#124; ई-पण्डित</title>
		<link>http://ms.pankajnarula.webfactional.com/200704/how_to_type_in_hindi/comment-page-1/#comment-547</link>
		<dc:creator>अथ श्री पॉडकास्टिंग महापुराण &#124; ई-पण्डित</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Dec 2009 01:06:20 +0000</pubDate>
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		<description>[...] समय पहले मिर्ची सेठ ने बनाया, जिसे आप यहाँ देख सकते हैं। मैं भी बहुत समय से इस तरह [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] समय पहले मिर्ची सेठ ने बनाया, जिसे आप यहाँ देख सकते हैं। मैं भी बहुत समय से इस तरह [...]</p>
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	<item>
		<title>Comment on हिन्दी रशियन भाई भाई by amit</title>
		<link>http://ms.pankajnarula.webfactional.com/200909/199/comment-page-1/#comment-741</link>
		<dc:creator>amit</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Sep 2009 20:34:06 +0000</pubDate>
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		<description>काला बाज़ार तो जनाब हर उस बाज़ार का भाग होता है जहाँ डिमांड सप्लाई से अधिक होती है। यहाँ भारत में भी तो एकाध दशक पहले तक आम ही था ऐसा (जैसा अपने को पता है उसी के अनुसार)। राशन मिला करता तो तेल, दाल, चावल आदि भी मिलता था राशन में और उसका काला बाज़ार भी खूब होता था। नब्बे तक आई कई हिन्दी फिल्मों में भी जमकर काला बाज़ार दिखाया गया है, यूँ कहें कि यह एक सटल (subtle) भाग होता था किसी भी हिन्दी फिल्म का, ठीक वैसे ही जैसे गाड़ियाँ, साइकल, विलेन की मक्कारी आदि! :)

वैसे कुछ गड़बड़ जान पड़ती है आपके ब्लॉग पर इधर, फीड में &quot;????&quot; आ रहा है और ऊपर Home के लिंक में भी यही नज़र आ रहा है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>काला बाज़ार तो जनाब हर उस बाज़ार का भाग होता है जहाँ डिमांड सप्लाई से अधिक होती है। यहाँ भारत में भी तो एकाध दशक पहले तक आम ही था ऐसा (जैसा अपने को पता है उसी के अनुसार)। राशन मिला करता तो तेल, दाल, चावल आदि भी मिलता था राशन में और उसका काला बाज़ार भी खूब होता था। नब्बे तक आई कई हिन्दी फिल्मों में भी जमकर काला बाज़ार दिखाया गया है, यूँ कहें कि यह एक सटल (subtle) भाग होता था किसी भी हिन्दी फिल्म का, ठीक वैसे ही जैसे गाड़ियाँ, साइकल, विलेन की मक्कारी आदि! <img src='http://ms.pankajnarula.webfactional.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>वैसे कुछ गड़बड़ जान पड़ती है आपके ब्लॉग पर इधर, फीड में &#8220;????&#8221; आ रहा है और ऊपर Home के लिंक में भी यही नज़र आ रहा है।</p>
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	<item>
		<title>Comment on हिन्दी रशियन भाई भाई by ज्ञानदत्त पाण्डेय</title>
		<link>http://ms.pankajnarula.webfactional.com/200909/199/comment-page-1/#comment-740</link>
		<dc:creator>ज्ञानदत्त पाण्डेय</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Sep 2009 06:33:22 +0000</pubDate>
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		<description>समाजवाद और मसाजवाद में अक्षरों का ही हेर फेर है!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>समाजवाद और मसाजवाद में अक्षरों का ही हेर फेर है!</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on सुरेन्द्र मोहन पाठक के नावलों के पात्र by राजीव सिन्हा</title>
		<link>http://ms.pankajnarula.webfactional.com/200509/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a0%e0%a4%95/comment-page-1/#comment-257</link>
		<dc:creator>राजीव सिन्हा</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 13 Sep 2009 10:46:48 +0000</pubDate>
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		<description>दीवानगी का आलम यह है कि पाठक जी के नये उपन्यास की खबर मिलते ही बीस किलोमीटर का सफ़र तय करके लेने जाता हूँ और वापस पहुँचने का इन्तेज़ार भी नहीं करता।ऑटो में आधा उपन्यास खत्म भी हो चुका होता है।पुराने पाठकों को कर्नल मुखर्ज़ी, प्रमिला,प्रमोद जैसे कई और पात्र भी ज़रूर याद होंगे। विमल सिरीज ने ही नीलम, तुका, वागले,इरफान,विक्टर,मुबारक अली जैसे अविस्मरणीय किरदार दिये हैं। विकास गुप्ता(ठग सम्राट-बारह सवाल,धोखाधड़ी,आठ दिन) मुकेश माथुर(वकील-वारिस,वहशी)और विवेक आगाशे(डिटेक्टिव-क्राईम क्लब,कोई गवाह नहीं,गंदा खून) जैसे चरित्र भी सीरीज नायक का दर्ज़ा हासिल कर चुके हैं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>दीवानगी का आलम यह है कि पाठक जी के नये उपन्यास की खबर मिलते ही बीस किलोमीटर का सफ़र तय करके लेने जाता हूँ और वापस पहुँचने का इन्तेज़ार भी नहीं करता।ऑटो में आधा उपन्यास खत्म भी हो चुका होता है।पुराने पाठकों को कर्नल मुखर्ज़ी, प्रमिला,प्रमोद जैसे कई और पात्र भी ज़रूर याद होंगे। विमल सिरीज ने ही नीलम, तुका, वागले,इरफान,विक्टर,मुबारक अली जैसे अविस्मरणीय किरदार दिये हैं। विकास गुप्ता(ठग सम्राट-बारह सवाल,धोखाधड़ी,आठ दिन) मुकेश माथुर(वकील-वारिस,वहशी)और विवेक आगाशे(डिटेक्टिव-क्राईम क्लब,कोई गवाह नहीं,गंदा खून) जैसे चरित्र भी सीरीज नायक का दर्ज़ा हासिल कर चुके हैं।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>Comment on यहाँ कितना अच्छा है by Avinash Keshri</title>
		<link>http://ms.pankajnarula.webfactional.com/200810/%e0%a4%af%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9b%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/comment-page-1/#comment-734</link>
		<dc:creator>Avinash Keshri</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Jun 2009 04:59:25 +0000</pubDate>
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		<description>पर सोना भी तो जरुरी है…</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पर सोना भी तो जरुरी है…</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on हिन्दी चुटकले &#8211; अनुगूँज 21 by Ganesh jogi</title>
		<link>http://ms.pankajnarula.webfactional.com/200607/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%9f%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a5%82%e0%a4%81%e0%a4%9c-21/comment-page-1/#comment-409</link>
		<dc:creator>Ganesh jogi</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 May 2009 09:00:32 +0000</pubDate>
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		<description>संता बंता पेड़ पर बैठे हैं। बंता गाना गाना शुरु कर देता है। चार पांच गाने गाने के बाद वह थोड़ा चुप होता है व फिर चमगादड़ की तरह उलटा लटक कर फिर गाना शुरु कर देता है। संता पूछता है - ओ भाई की कर रिहा है। बंता - यार पहले साइ़ड ए के गा रहा था अब साइड बी के गाने गा रहा हूँ।
दो लड़किया बातें कर रही हैं। ए शीना, ए शीना ते को पता है जब लड़किया बातें कर रही होती हैं तो लड़को के कान खड़े हो जाते हैं। दूसरी लड़की - हैं बहन उसे कान भी कहते हैं। (यह जोक बाहरवीं में हमारे दोस्तों जैसे कम्पयूटर के मास्टर जी ने सुनाया था)
तमिल, गुजराती व पंजाबी इक्कठे काम करते हैं व रोज लंच पर मिलते हैं। तीनो एक ही तरह का खाना खा खा कर पक चुके होते हैं। तमिल कहता है कि गर कल फिर लंच में बीवी ने इडली रखी तो वह कूद कर जान दे दे गा। गुजराती कहता है कि अगर उसे फिर एक बार खाकरा खाने को मिला तो वह भी बनाने वाले के पास चला जाएगा। पंजाबी भी परांठों के बारे में यही विचार जाहिर करता हैं। अगले दिन तीनों मिलते हैं व लंच में वही देख कर तीनों कूद कर जान दे देते हैं। शम्शान में तीनों की बीवियाँ बात कर रही हैं। तमिल बीवी - हाय अगर मुझे पता होता कि ये इडली के कारण जान दे देंगे तो में उतपम्म बना कर भेजती। गुजराती - हाय मुझे भी खाकरा ले डूबा। हाय रे। आखिर में पंजाबी बीवी के चेहरे पर बहुत परेशानी के भाव हैं व वह कहती पर मेरे सरदार जी तो सुबह आप ही लंच बनाते थे।
एक ग्रामीण शहर में आ कर घूम रहा है व घूमने के बाद थक कर कुछ खाने की जगह ढूढंता है। शहर के बाहर बाहर होने की वजह से वहाँ कुछ मिलता नहीं और वह भटकता हुआ कचहरी पहुँच जाता है। उसे कचहरी के बारे में जानकारी नहीं होती और व किसी जिरह चल रहे केस की कार्यवाही में पहुँत जाता है। कार्यवाही के दौरान शोर मचने पर जज चुप कराने के लिए कहता है - ऑडर ऑडर। अपना ग्रामीण भाई - हाँ हाँ दो कुलचे ते इक छोलयाँ दी प्लेट (यह मेरा बचपन का सबसे पहला याद किया चुटकला है)
आजादी की लड़ाई के दिनों में महात्मा गाँधी के खादी प्रेम के चलते सभी को खादी ही प्रयोग करनी पड़ती थी। पंडित नेहरु को सर्दियों में लग गया जुकाम अब खादी का रुमाल होता है खुरदरा। बस जब नाक पोंछनी नाक पर खादी रेगमार जैसे काम करती। इस मारे नाक एक दम लाल हो गया। गाँधी जी ने नेहरु के लाल नाक को देख कर कहा कि - क्यूँ भई जूकाम कैसा है। नेहरु बोले - चिंता की बात नहीं आप के खादी के रुमालों से कुछ दिनों में नाक ही नहीं रहेगा फिर जुकाम ही न होगा।
वैसे तो पाँच ही लिखना चाहता था पर हरियाणा वासी हूँ इसलिए बोनस में एक हरियाणवी चुटकला भी बनता है

लाँग रुट की बस का कंडक्टर एक गाँव वालो से बड़ा परेशान था। गाँव वाले हाथ देकर अगले गाँव जाने के लिए भी बस रुकवा लेते थे जबकि वह बस का स्टॉप भी नहीं था। अब बस जा रही है व वह गाँव आने वाला है। कंडक्टर पीछे से ड्राइवर को आवाज लगाता है कि - रै भाई इब के ना रोकिए, कोई रस्ते माँ हो तो सालयाँ ने पेल दिए। ड्राइवर भी जोश में आकर गाड़ी की स्पीड बढ़ा देता है। फिर क्या देखता है की गाँव आने पर एक बुढ़िया एक छोटे से लड़के, जिस ने सिर्फ बुशर्ट ही पहन रखी है, के साथ सड़के के बीचो बीच खड़ी है। ड्राइवर को गाड़ी में ब्रेक लगानी पड़ी जाती है। ड्राइवर थोड़ा सा साइड मार कर अपनी खिड़की से सर निकाल कर गुस्से में पूछता है - रै माई कित जा गी। बुढ़िया - ना बेटे जाणा तो कोनी, बालक रोवे था इसने भोपूं बजा के दिखा दे।

8 Responses
नीरज त्रिपाठी

जुलाई 15th, 2006 at 6:59 pm

1
मिर्ची सेठ
बोनस वाला हरियाणवी चुटकला बहुत मस्त है

रवि

जुलाई 15th, 2006 at 7:10 pm

2
चलो, कोई तो डरा!

और डर कर हमें हँसा गया

SHUAIB

जुलाई 16th, 2006 at 2:02 am

3</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>संता बंता पेड़ पर बैठे हैं। बंता गाना गाना शुरु कर देता है। चार पांच गाने गाने के बाद वह थोड़ा चुप होता है व फिर चमगादड़ की तरह उलटा लटक कर फिर गाना शुरु कर देता है। संता पूछता है &#8211; ओ भाई की कर रिहा है। बंता &#8211; यार पहले साइ़ड ए के गा रहा था अब साइड बी के गाने गा रहा हूँ।<br />
दो लड़किया बातें कर रही हैं। ए शीना, ए शीना ते को पता है जब लड़किया बातें कर रही होती हैं तो लड़को के कान खड़े हो जाते हैं। दूसरी लड़की &#8211; हैं बहन उसे कान भी कहते हैं। (यह जोक बाहरवीं में हमारे दोस्तों जैसे कम्पयूटर के मास्टर जी ने सुनाया था)<br />
तमिल, गुजराती व पंजाबी इक्कठे काम करते हैं व रोज लंच पर मिलते हैं। तीनो एक ही तरह का खाना खा खा कर पक चुके होते हैं। तमिल कहता है कि गर कल फिर लंच में बीवी ने इडली रखी तो वह कूद कर जान दे दे गा। गुजराती कहता है कि अगर उसे फिर एक बार खाकरा खाने को मिला तो वह भी बनाने वाले के पास चला जाएगा। पंजाबी भी परांठों के बारे में यही विचार जाहिर करता हैं। अगले दिन तीनों मिलते हैं व लंच में वही देख कर तीनों कूद कर जान दे देते हैं। शम्शान में तीनों की बीवियाँ बात कर रही हैं। तमिल बीवी &#8211; हाय अगर मुझे पता होता कि ये इडली के कारण जान दे देंगे तो में उतपम्म बना कर भेजती। गुजराती &#8211; हाय मुझे भी खाकरा ले डूबा। हाय रे। आखिर में पंजाबी बीवी के चेहरे पर बहुत परेशानी के भाव हैं व वह कहती पर मेरे सरदार जी तो सुबह आप ही लंच बनाते थे।<br />
एक ग्रामीण शहर में आ कर घूम रहा है व घूमने के बाद थक कर कुछ खाने की जगह ढूढंता है। शहर के बाहर बाहर होने की वजह से वहाँ कुछ मिलता नहीं और वह भटकता हुआ कचहरी पहुँच जाता है। उसे कचहरी के बारे में जानकारी नहीं होती और व किसी जिरह चल रहे केस की कार्यवाही में पहुँत जाता है। कार्यवाही के दौरान शोर मचने पर जज चुप कराने के लिए कहता है &#8211; ऑडर ऑडर। अपना ग्रामीण भाई &#8211; हाँ हाँ दो कुलचे ते इक छोलयाँ दी प्लेट (यह मेरा बचपन का सबसे पहला याद किया चुटकला है)<br />
आजादी की लड़ाई के दिनों में महात्मा गाँधी के खादी प्रेम के चलते सभी को खादी ही प्रयोग करनी पड़ती थी। पंडित नेहरु को सर्दियों में लग गया जुकाम अब खादी का रुमाल होता है खुरदरा। बस जब नाक पोंछनी नाक पर खादी रेगमार जैसे काम करती। इस मारे नाक एक दम लाल हो गया। गाँधी जी ने नेहरु के लाल नाक को देख कर कहा कि &#8211; क्यूँ भई जूकाम कैसा है। नेहरु बोले &#8211; चिंता की बात नहीं आप के खादी के रुमालों से कुछ दिनों में नाक ही नहीं रहेगा फिर जुकाम ही न होगा।<br />
वैसे तो पाँच ही लिखना चाहता था पर हरियाणा वासी हूँ इसलिए बोनस में एक हरियाणवी चुटकला भी बनता है</p>
<p>लाँग रुट की बस का कंडक्टर एक गाँव वालो से बड़ा परेशान था। गाँव वाले हाथ देकर अगले गाँव जाने के लिए भी बस रुकवा लेते थे जबकि वह बस का स्टॉप भी नहीं था। अब बस जा रही है व वह गाँव आने वाला है। कंडक्टर पीछे से ड्राइवर को आवाज लगाता है कि &#8211; रै भाई इब के ना रोकिए, कोई रस्ते माँ हो तो सालयाँ ने पेल दिए। ड्राइवर भी जोश में आकर गाड़ी की स्पीड बढ़ा देता है। फिर क्या देखता है की गाँव आने पर एक बुढ़िया एक छोटे से लड़के, जिस ने सिर्फ बुशर्ट ही पहन रखी है, के साथ सड़के के बीचो बीच खड़ी है। ड्राइवर को गाड़ी में ब्रेक लगानी पड़ी जाती है। ड्राइवर थोड़ा सा साइड मार कर अपनी खिड़की से सर निकाल कर गुस्से में पूछता है &#8211; रै माई कित जा गी। बुढ़िया &#8211; ना बेटे जाणा तो कोनी, बालक रोवे था इसने भोपूं बजा के दिखा दे।</p>
<p>8 Responses<br />
नीरज त्रिपाठी</p>
<p>जुलाई 15th, 2006 at 6:59 pm</p>
<p>1<br />
मिर्ची सेठ<br />
बोनस वाला हरियाणवी चुटकला बहुत मस्त है</p>
<p>रवि</p>
<p>जुलाई 15th, 2006 at 7:10 pm</p>
<p>2<br />
चलो, कोई तो डरा!</p>
<p>और डर कर हमें हँसा गया</p>
<p>SHUAIB</p>
<p>जुलाई 16th, 2006 at 2:02 am</p>
<p>3</p>
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	</item>
	<item>
		<title>Comment on काली लैला by Abhishek Pandey</title>
		<link>http://ms.pankajnarula.webfactional.com/200904/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a5%88%e0%a4%b2%e0%a4%be/comment-page-1/#comment-737</link>
		<dc:creator>Abhishek Pandey</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 May 2009 06:00:20 +0000</pubDate>
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		<description>bahut hi accha</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>bahut hi accha</p>
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		<title>Comment on हिन्दी चुटकले &#8211; अनुगूँज 21 by Abhishek Pandey</title>
		<link>http://ms.pankajnarula.webfactional.com/200607/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%9f%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a5%82%e0%a4%81%e0%a4%9c-21/comment-page-1/#comment-408</link>
		<dc:creator>Abhishek Pandey</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 May 2009 07:55:44 +0000</pubDate>
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		<description>aap ka santa banta ki churkulla bahut hi accha hi aap isi tarh chutkulle screen per diya kren
                                                             Abhishek pandey
                                                       vill-hajirwa po-bithria kalan
                                                       diss.siddarth nagar (u.p.)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>aap ka santa banta ki churkulla bahut hi accha hi aap isi tarh chutkulle screen per diya kren<br />
                                                             Abhishek pandey<br />
                                                       vill-hajirwa po-bithria kalan<br />
                                                       diss.siddarth nagar (u.p.)</p>
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