कुछ दिन पहले सौतन के बेटे (मेरा मोबाइल जिस पर ईमेल आती है) ने आलोक का कम-लिखे-को-ज्यादा समझने वाला संदेश दिया कि “भई हम आपके देश में है, समय मिले तो फोन कीजिएगा”। हमारी खुशी का ठिकाना नहीं कि चलिए आखिरकार आलोक से मिलना हो पाएगा। आलोक भाई ने अंतर्जाल पर हिन्दी का पहला जाल [...]
कॉलेज के जमाने में होस्टल की मैस में शनिवार को नाश्ते में मूली के पराँठे मिलते थे। उस समय दोस्तों से मजाक में कई बार इस बात पर मनन होता था कि यदि हम बहुत सारे पराँठे खा लें और इसके बाद जो होता है थोड़े थोड़े अंतराल पर होने की बजाए अगर एक सार [...]
कंस्लटिंग के चलते बहुत सी कम्पनियों में काम करने को मिलता है। बहुत से लोगों का काम करने के वातावरण को देखने, उसमें घुलने मिलने को भी मिलता है। इसे ग्लोबलाईजेशन की दुर्घटना कहें या कुछ और लगभग सभी कम्पनियों में कम्पयूटर स्टाफ में अपने देसी भाई यानि भारतीय भी खूब मिलते हैं। भारतीय होने [...]
पिछले महीने एक खिलौना खरीदा इतना पसंद है कि श्रीमती जी का कहना है कि पहले लैपटॉप सौतन थी अब यह सौतन का बच्चा आ गया है। तो बताईए क्या। यदि आपने बता दिया कि मैं किसके बारे में बात कर रहा हूँ तो इसके बारे में आगे लिखेंगे।
कहते हैं मिर्ची की तासीर गर्म होती है। मुझे भी गर्म जगह ही पसंद आती हैं। ठंडे मौसम के चलते लुईविल छोड़ कर कैलिफोर्निया गया था। जिंदगी का जागते हुए सबसे कम तापमान 14 डिग्री फारेनहाईट देखा था। पर वह रिकार्ड भी टूट गया। आजकल काम के सिलसिले में मिलवॉकी में हूँ। ठंड़ी इतनी है [...]
कभी आप ने स्वर्ग की कल्पना की है सच क्या है यह तो पता नहीं कोई जानता है कि नहीं पर यदि कल्पना की दुनिया कि कहानियों व फिल्मों को देखें तो आप पाएंगे कि इस कल्पना में खूबसूरत वादियाँ, हर ओर हरियाली, सुंदर से पहाड़, उन की चोटियों पर दूर से दिखती बर्फ व [...]
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