चिट्ठों की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है उनका अनौपचारिकता का लेखन। लिखते हुए भाई लोगों को इस बात की चिन्ता नहीं रहती कि सुन्दर लिख रहा हूँ कि नहीं। कहीं कुछ नियमों के बाहिर तो नहीं लिख दिया। कहीं संपादक की कैंची ज्यादा तो नहीं चल जाएगी मेरे लेख पर। लेख छपेगा भी […]

१९४४ में लंदन युनिवर्सटी की ग्रेजूएट होती क्लास को दिए गए व्याख्यान में सी एस लुईस ने एक अंदर के छल्ले की बात की थी। उनके अनुसार हर ग्रुप, समाज, पार्टी में एक अंदर का छल्ला (अंग्रेजी में इन्नर रिंग) होता है और इस छल्ले से जुड़ने की, इस में होने की चाह सभी में […]

बचपन में जब भारत एक खोज आता था तो उसके आरंभ में आने वाला गीत बड़ा सही लगता था। सुनने में अच्छा था और बोल मुंह पर चढ़ भी गए थे। यहाँ आने के बात वह गीत के बारे में याद तो था पर उस से अधिक कुछ नहीं। फिर घूमते घूमते “Hymn of Creation” […]

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