गेपिंग वोयड एक कलाकार व मशहूर ब्लॉगर हैं जो कि बिज़नेस कार्डस के पीछे कार्टून बनाते हैं। उनका नया कार्टून देखा भगवान न करे किसी को ऐसा दिन देखना पड़े

अभी थोड़े दिन पहले 7/7/7 निकली है उस दिन दुनिया के नए सात अजूबों की सूची जारी की गई। दुनिया में सात अजूबों के अलावा सात पाप भी प्रसिद्ध हैं। लेकिन इन सभी में से एक पाप ऐसा है जो सबसे बेकार हैं। चलिए देखते हैं आप की नजरों में सबसे घटिया पाप कौन सा [...]

डसिडेराटा – मैक्स एहरमैन की बड़ी ही सुंदर कविता है। अतानु डे की एक प्रविष्टि से इसके बारे में पता चला। बहुत ही कम शब्दों में मैक्स ने जिंदगी की बहुत सी बातें कह दी। मौका लगे तो पढ़िएगा। मैंने हिन्दी में एक पैरा अनुवाद करने की कोशिश की है । बाकी सारी की सारी अंग्रेजी में [...]

चिट्ठों की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है उनका अनौपचारिकता का लेखन। लिखते हुए भाई लोगों को इस बात की चिन्ता नहीं रहती कि सुन्दर लिख रहा हूँ कि नहीं। कहीं कुछ नियमों के बाहिर तो नहीं लिख दिया। कहीं संपादक की कैंची ज्यादा तो नहीं चल जाएगी मेरे लेख पर। लेख छपेगा भी [...]

१९४४ में लंदन युनिवर्सटी की ग्रेजूएट होती क्लास को दिए गए व्याख्यान में सी एस लुईस ने एक अंदर के छल्ले की बात की थी। उनके अनुसार हर ग्रुप, समाज, पार्टी में एक अंदर का छल्ला (अंग्रेजी में इन्नर रिंग) होता है और इस छल्ले से जुड़ने की, इस में होने की चाह सभी में [...]

बचपन में जब भारत एक खोज आता था तो उसके आरंभ में आने वाला गीत बड़ा सही लगता था। सुनने में अच्छा था और बोल मुंह पर चढ़ भी गए थे। यहाँ आने के बात वह गीत के बारे में याद तो था पर उस से अधिक कुछ नहीं। फिर घूमते घूमते “Hymn of Creation” [...]

आज एक दोस्त से बात करते हुए एक और दोस्त राहुल का जिकर् आन पड़ा उसका ब्लॉग जाकर पढ़ना शुरु किया तो पता लगा कि भैया को गज़लों का शौक हो आया है। अब इसे छड़ेपन की निशानी माने या परिपक्वता की तो पता नहीं। पर राहुल काफी सही शेरों के बारे में लिखते हैं। [...]

आज घूमते घूमते एक गजल बोलों के सजाल पर जा पहुँचा। काफी सुंदर गजलों का संग्रह था। संग्रह-कर्ता के बारे में जानने का प्रयास किया तो पता चला वह जया झा हैं जिन्होंने कुछ समय पहले ब्लॉगिंग पर छोटा सा शोध किया था और परिणाम भी घोषित हो चुके हैं। थोड़ा और घूमने पर उनका [...]

शादी की उमर

पिछले कुछ सालों में मुझे सहित सभी दोस्तों की या तो शादियां हो गई या फिर मँगनियाँ | कुछ वीर बालक बचे हैं लेकिन वे भी जल्दी ही करने की फिराक में हैं | हम सभी की उम्र २६ से ३० के बीच में ही है | जिन दोस्तों की अभी शादी नहीं हूई है [...]

वैसे तो अनुनाद जी आयोजित अनुगूँज १२ का प्रसाद बंट चुका है पर अपुन भी अपनी खिचड़ी पका के ही मानेगें। आज मन में जो विचार आए पेल दिए। तो लीजिए हाजिर हैं दस विचार

१. अवगुण नाव के पेंदे में हुए छेद के समान है जो अंततः नाव की तरह आदमी को डुबो ही देता [...]

« Previous Entries  Next Page »