आलोक भाई अभी अभी अमरीका से हो कर गए हैं, शायद यहाँ से कुछ खास चीज खाकर गए हैं ( समीर जी व जीतू भाई – अफसोस आलोक अपुन पियक्कड़ो जैसे नहीं हैं, नहीं तो लिखता खा-पीकर गए हैं)। इस लिए की जाते ही फटाक फटाक दो “बड़ी सी” प्रविष्टियां लिख डाली। बड़ी सी [...]

कुछ दिन पहले सौतन के बेटे (मेरा मोबाइल जिस पर ईमेल आती है) ने आलोक का कम-लिखे-को-ज्यादा समझने वाला संदेश दिया कि “भई हम आपके देश में है, समय मिले तो फोन कीजिएगा”। हमारी खुशी का ठिकाना नहीं कि चलिए आखिरकार आलोक से मिलना हो पाएगा। आलोक भाई ने अंतर्जाल पर हिन्दी का [...]

कंस्लटिंग के चलते बहुत सी कम्पनियों में काम करने को मिलता है। बहुत से लोगों का काम करने के वातावरण को देखने, उसमें घुलने मिलने को भी मिलता है। इसे ग्लोबलाईजेशन की दुर्घटना कहें या कुछ और लगभग सभी कम्पनियों में कम्पयूटर स्टाफ में अपने देसी भाई यानि भारतीय भी खूब मिलते हैं। भारतीय होने [...]

कहते हैं समय बड़ा बलवान, पर भाई मेरे ख्याल से अमरीकी समय से भी बलवान हैं। हर साल दो बार समय बदल देते हैं। मेरा इशारा है “डे-लाइट सेविंग्स” की तरफ। अभी आज सुबह समय एक घंटा आगे हो गया यानि कि स्प्रिंग अहेड या फिर बसंत उछाल। बसंत के आते ही सूरज थोड़ा पहले उगना शुरु हो जाता है व ज्यादा देर तक रोशनी रहती [...]

पूंजीवाद का सिद्धांत है कि यदि कोई किसी चीज के पैसा देता है तो वह चीज बाजार में आ जाएगी। यहाँ कैलिफोर्निया में सरकारी वाहन विभाग (DMV) जो कि आपके वाहनों का पंजीकरण व ड्राइविंग लाईसेंस वगैरह का काम करता है आप को अपनी कारों के लिए मनभावन लाइसेंस प्लेट नम्बर लेने देता है। जैसे [...]

शनिवार की सुबह है, और पहली खबर न्यूयार्क टाइम्स में पढ़ी की बम्बई के मशहूर डिब्बे वालों की जैसी लंच वितरण सेवा अब आमछी वैली में भी शुरु हो गई है। खबर के हिसाब से यह २००२ से चल रही है पर मुझे अभी ही पता चला। शुरु करने वाली हैं कविता श्रीवथसन। मजे की [...]

बाहर रहते हुए कभी कभी कुछ विचार आते हैं जो कि मन को सालते हैं । व्यक्तिगत स्तर पर घर संबधियों की चिंता, क्या मैं एक अच्छा भाई, बेटा साबित हो रहा हूँ इत्यादि। इस स्तर से उठते हुए राष्ट्रीय स्तर पर यहां रहते हुए मैं देश के लिए क्या कर रहा हूँ। खासकर [...]