अनूप भैया ने अपनी चिकाईगरी की शैली में लिखा कि माजरा क्या है। कहते हैं कि जो मन में आए लिखो और जाते जाते मेरे खाली दिमाग की खाली दीवारों पर स्याही भी(painting the mind) पोत गए कि मर्जी आप की है पर इंडिया शाइनिंग और मेरा भारत परेशान पर भी लिख सकते हो। अब […]

इस बात में तो कोई दो राय नहीं कि शिक्षा हमेंशा से महत्वपूर्ण रही है। देखा जाए तो शायद शिक्षा आदि काल से ही मनुष्य के लिए आवश्यक रही होगी। सोचिए इस आदि मानव की जिसने पहली बार अग्नि देव प्रसन्न किए होंगे। इस अद्भुत शिक्षा से उसे कितने आनंद की प्राप्ति हुई […]

रमण जी ने चमत्कारी अनुभव की गूँज कराके फिर से विचारों के दो राहे पर ला पटका है। एक तरफ विज्ञान-आभियांत्रिकी में शिक्षित दिमाग यह मानने को तैयार नहीं है कि ऐसी कोई चीज हो सकती है तो दूसरी तरफ दाँया मस्तिषक कहता है कि मूढ़ अगर तेरी सोच में कुछ बात नहीं बैठती […]

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