फिल्में देखने का शगल अंतर्राष्ट्रीय है। दुनिया में हर जगह फिल्में देखी जाती हैं। वहाँ भी जहां की फिल्म इंडस्ट्री अपने चरम पर है और वहां भी जहाँ फिल्में नहीं के बराबर बनती हैं। लेकिन एक बात पक्की है हर जगह फिल्मों के लिए लोगों का जज्बा बहुत भंयकर है। लोगो को फिल्मों के बारे […]

अभी कुछ समय पहले एक ब्लॉग प्रविष्टि पढ़ी, बड़ी रोचक लगी। इस पर खूब मनन भी किया, हर चिट्ठाकार की तरह मन में विचार आया कि मौका लगते ही इस पर एक प्रविष्टि पेल दूँगा। अभी इस विचार को मन में घूमते हूए कुछ समय ही हुआ था कि राजेश जी सुमात्रा वालों ने अनुगूँज […]

वैसे तो अनुनाद जी आयोजित अनुगूँज १२ का प्रसाद बंट चुका है पर अपुन भी अपनी खिचड़ी पका के ही मानेगें। आज मन में जो विचार आए पेल दिए। तो लीजिए हाजिर हैं दस विचार

१. अवगुण नाव के पेंदे में हुए छेद के समान है जो अंततः नाव की तरह आदमी को डुबो ही देता […]

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