आलोक भाई अभी अभी अमरीका से हो कर गए हैं, शायद यहाँ से कुछ खास चीज खाकर गए हैं ( समीर जी व जीतू भाई – अफसोस आलोक अपुन पियक्कड़ो जैसे नहीं हैं, नहीं तो लिखता खा-पीकर गए हैं)। इस लिए की जाते ही फटाक फटाक दो “बड़ी सी” प्रविष्टियां लिख डाली। बड़ी सी [...]
लॉयन व गब्बर के डर से लिख रहा हूँ यह प्रविष्टि। भाया धंधो चोपट थोड़े ही करना है मन्ने। ते लो जी मिर्ची सेठ उर्फ पंकज भाई अंबाले वाले की चुटकला यज्ञ में आहूति
संता बंता पेड़ पर बैठे हैं। बंता गाना गाना शुरु कर देता है। चार पांच गाने गाने के बाद वह थोड़ा चुप होता [...]
स्वामी जी की अति-आदर्शवाद अनुगूँज प्रविष्टि में दी गई छवि जिस में कच्ची मिट्टी से कुम्हार घड़ा बना रहा है बड़ी ही उपयुक्त है। कच्ची मिट्टी यानि बच्चे जो कि भविष्य हैं का बनना इस बात पर निर्भर करता है कि कुम्हार रुपी माँ बाप उसे कैसे ढालते हैं। उपमा सही बन पड़ी है, इस [...]
फिल्में देखने का शगल अंतर्राष्ट्रीय है। दुनिया में हर जगह फिल्में देखी जाती हैं। वहाँ भी जहां की फिल्म इंडस्ट्री अपने चरम पर है और वहां भी जहाँ फिल्में नहीं के बराबर बनती हैं। लेकिन एक बात पक्की है हर जगह फिल्मों के लिए लोगों का जज्बा बहुत भंयकर है। लोगो को फिल्मों के बारे [...]
अभी कुछ समय पहले एक ब्लॉग प्रविष्टि पढ़ी, बड़ी रोचक लगी। इस पर खूब मनन भी किया, हर चिट्ठाकार की तरह मन में विचार आया कि मौका लगते ही इस पर एक प्रविष्टि पेल दूँगा। अभी इस विचार को मन में घूमते हूए कुछ समय ही हुआ था कि राजेश जी सुमात्रा वालों ने अनुगूँज [...]
वैसे तो अनुनाद जी आयोजित अनुगूँज १२ का प्रसाद बंट चुका है पर अपुन भी अपनी खिचड़ी पका के ही मानेगें। आज मन में जो विचार आए पेल दिए। तो लीजिए हाजिर हैं दस विचार
१. अवगुण नाव के पेंदे में हुए छेद के समान है जो अंततः नाव की तरह आदमी को डुबो ही देता [...]
अनूप भैया ने अपनी चिकाईगरी की शैली में लिखा कि माजरा क्या है। कहते हैं कि जो मन में आए लिखो और जाते जाते मेरे खाली दिमाग की खाली दीवारों पर स्याही भी(painting the mind) पोत गए कि मर्जी आप की है पर इंडिया शाइनिंग और मेरा भारत परेशान पर भी लिख सकते हो। अब [...]
इस बात में तो कोई दो राय नहीं कि शिक्षा हमेंशा से महत्वपूर्ण रही है। देखा जाए तो शायद शिक्षा आदि काल से ही मनुष्य के लिए आवश्यक रही होगी। सोचिए इस आदि मानव की जिसने पहली बार अग्नि देव प्रसन्न किए होंगे। इस अद्भुत शिक्षा से उसे कितने आनंद की प्राप्ति हुई [...]
रमण जी ने चमत्कारी अनुभव की गूँज कराके फिर से विचारों के दो राहे पर ला पटका है। एक तरफ विज्ञान-आभियांत्रिकी में शिक्षित दिमाग यह मानने को तैयार नहीं है कि ऐसी कोई चीज हो सकती है तो दूसरी तरफ दाँया मस्तिषक कहता है कि मूढ़ अगर तेरी सोच में कुछ बात नहीं बैठती [...]
जब अतुल ने लालू जी का विषय रखा तो सोचा कि अच्छा है खूब लिखेंगे। पर जब लिखने बैठा तो पता लगा कि मैं जितना जानता हूँ सब मीडिया की दी हुई सोच है। कभी बिहार जाने का मौका नहीं लगा। जो पता था वह यह कि बड़े मसखरे किस्म के घाघ नेता हैं जोकि [...]
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