आलोक भाई अभी अभी अमरीका से हो कर गए हैं, शायद यहाँ से कुछ खास चीज खाकर गए हैं ( समीर जी व जीतू भाई - अफसोस आलोक अपुन पियक्कड़ो जैसे नहीं हैं, नहीं तो लिखता खा-पीकर गए हैं)। इस लिए की जाते ही फटाक फटाक दो “बड़ी सी” प्रविष्टियां लिख डाली। बड़ी सी […]
लॉयन व गब्बर के डर से लिख रहा हूँ यह प्रविष्टि। भाया धंधो चोपट थोड़े ही करना है मन्ने। ते लो जी मिर्ची सेठ उर्फ पंकज भाई अंबाले वाले की चुटकला यज्ञ में आहूति
संता बंता पेड़ पर बैठे हैं। बंता गाना गाना शुरु कर देता है। चार पांच गाने गाने के बाद वह थोड़ा चुप होता […]
स्वामी जी की अति-आदर्शवाद अनुगूँज प्रविष्टि में दी गई छवि जिस में कच्ची मिट्टी से कुम्हार घड़ा बना रहा है बड़ी ही उपयुक्त है। कच्ची मिट्टी यानि बच्चे जो कि भविष्य हैं का बनना इस बात पर निर्भर करता है कि कुम्हार रुपी माँ बाप उसे कैसे ढालते हैं। उपमा सही बन पड़ी है, इस […]