बहुत दिन से लिखे नहीं थे तो मन किया कि लिखते हैं। वैसे अभी भीआलस मार गए होते उ तो जाॅब बाबू रचित आई पैड बगल में पड़ा था कि शरमा के लिखने बैठ गए। अब लिखने तो बैठे हैं पर क्या लिखें? फ़िल्मों से बढ़िया क्या विषय हो सकता है। तो अभी थोड़े दिन पहले काॅकटेल देखी थी। उसका एक गाना बजने लगा

भवरों के कालेज का प्रोफेसर हूँ बेबी
अ़य्याशी के कम्प्यूटर का प्रोसेसर हूँ बेबी

मतलब क्या तो अनुप्रास अतिश्योक्ति अलंकृत भाव हैं। ऐसे गानों से ही आप खुश होते हो कि हिन्दी कविता का भविष्य उज्जवल है। चलिए काफ़ी बक बक कर ली। बाकी फिर कभी।