लोजी पाठक साहब जिन्होंने शुरुआती दौर में जेम्स हेडली चेज के नावलों का हिन्दी अनुवाद किया था अब पूरा सर्कल कर चुके हैं। उनके बहुचर्चित पैंसठ लाख की डकैती का अंग्रेजी संस्करण आया है। सुदर्शन पुरोहित जोकि सॉफ्टवेयर में काम करते हैं ने अंग्रेजी अनुवाद किया है। नाम है “Sixty Five Lakhs Heist” ज्यादा पढ़ने के लिए मिंट पर यहाँ पढ़ें।
एक तरह से तो अच्छा है कि अब चैनई, हैदराबाद व त्रिची में बैठे मानस भी पाठक साहब के पढ़ पाएंगे। पर सोचता हूँ कि क्या अनुवाद पाठक जी की पंजाबी मिश्रित शैली का मुकाबला कर पाएगा – अभी रमाकांत का कॉफी को विस्की का तड़का लगा कर पीना या फिर विमल का “तेरा भाणा मिठ्ठा लागे” गुरबाणी याद करना इत्यादि। वैसे अंग्रेजी बहुत समृद्ध भाषा है पर किसी की शैली को अनुवाद करना भी टेढा काम है। यदि कोई ब्लॉग बंधू अंग्रेजी अनुवाद पढ़े तो जरुर बताएं।
One Response
amit
April 25th, 2009 at 10:32 am
1वाकई, किसी पाठ का अनुवाद इतना कठिन नहीं होता जितना किसी की शैली को दूसरी भाषा में ढालना, यदि अनुवाद मूल लेखक स्वयं नहीं कर रहा है तो!
पाठक साहब के लिखे नॉवलों में कहानी से अधिक मुझे लेखन शैली पसंद है। सुनील सीरीज़ के उपन्यासों में सुनील से अधिक रमाकांत पसंद है जिसको जबरदस्त उसके डॉयलाग बनाते हैं। और बाकी किरदारों के भी जो डॉयलाग होते हैं, जो शब्दावली पाठक साहब प्रयोग में लाते हैं वह पूरे मामले को और बढ़िया बनाती है!
हम तो ओरिजिनल पढ़ सकते हैं इसलिए वही पढ़ेंगे, हाँ यह जानने की उत्सुक्ता अवश्य है कि अंग्रेज़ी अनुवाद कैसा बन पड़ा है। लेकिन तुलना वही व्यक्ति कर पाएगा जिसने हिन्दी वाला उपन्यास पढ़ा हो।
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