02 Sep
Posted by pankaj as दर्शन
गेपिंग वोयड एक कलाकार व मशहूर ब्लॉगर हैं जो कि बिज़नेस कार्डस के पीछे कार्टून बनाते हैं। उनका नया कार्टून देखा भगवान न करे किसी को ऐसा दिन देखना पड़े
ज्ञानदत्त पाण्डेय
September 2nd, 2007 at 9:39 pm
या! माई टीयर्स आर वाशिन्ग अवे माई फ्यूचर.
रवि
September 2nd, 2007 at 9:59 pm
एंड माई टीयर्स आर मेकिंग माई प्रजेन्ट टू ब्लर्ड…
rachna
September 2nd, 2007 at 10:03 pm
मर के भी जिंदा रहते है हम अपने रिश्तों मे पर जब रिश्ते मर जाते है हम ना जिंदा रहते है ना मरे हुए कहलाते है
शास्त्री जे सी फिलिप्
September 2nd, 2007 at 10:44 pm
प्रभु न करे कि ऐसा दिन किसी के जीवन में आये. लेकिन किसी कारण से आ जाये तो आंसू बहुत कुछ चीजों को धो डालते हैं — शास्त्री
मेरा स्वप्न: सन 2010 तक 50,000 हिन्दी चिट्ठाकार एवं, 2020 में एक करोड हिन्दी चिट्ठाकार !!
Amit
September 3rd, 2007 at 5:37 am
वैसे आँखों के डॉक्टर भी कहते हैं कि कभी-२ रोना आँखों के लिए अच्छा होता है, आँखों का स्नान हो जाता है।
अनूप शुक्ल
September 3rd, 2007 at 7:18 am
कभी-कभी रोना अच्छा होता है। उसके आंसू खुशी के रहे होंगे।
समीर लाल
September 3rd, 2007 at 8:16 am
रो रहा हूँ देखकर, सूखे हुए उस ताल को, आँसूओं की धार से, कुछ तो नमीं हो जायेगी!!
-भूत-भविष्य उसी पानी से डूबते भी हैं और सिंचते भी हैं. बस मात्रा(quantity) का फेर है, पंकज भाई.
राम प्रसाद ढीमर
February 17th, 2009 at 9:53 am
रोना आखों के लिए अच्छा होता है, आँखों का स्नान हो जाता है।
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8 Responses
ज्ञानदत्त पाण्डेय
September 2nd, 2007 at 9:39 pm
1या! माई टीयर्स आर वाशिन्ग अवे माई फ्यूचर.
रवि
September 2nd, 2007 at 9:59 pm
2एंड माई टीयर्स आर मेकिंग माई प्रजेन्ट टू ब्लर्ड…
rachna
September 2nd, 2007 at 10:03 pm
3मर के भी जिंदा रहते है
हम अपने रिश्तों मे
पर जब रिश्ते मर जाते है
हम ना जिंदा रहते है
ना मरे हुए कहलाते है
शास्त्री जे सी फिलिप्
September 2nd, 2007 at 10:44 pm
4प्रभु न करे कि ऐसा दिन किसी के जीवन में आये. लेकिन किसी कारण से आ जाये तो आंसू बहुत कुछ चीजों को धो डालते हैं — शास्त्री
मेरा स्वप्न: सन 2010 तक 50,000 हिन्दी चिट्ठाकार एवं,
2020 में एक करोड हिन्दी चिट्ठाकार !!
Amit
September 3rd, 2007 at 5:37 am
5वैसे आँखों के डॉक्टर भी कहते हैं कि कभी-२ रोना आँखों के लिए अच्छा होता है, आँखों का स्नान हो जाता है।
अनूप शुक्ल
September 3rd, 2007 at 7:18 am
6कभी-कभी रोना अच्छा होता है। उसके आंसू खुशी के रहे होंगे।
समीर लाल
September 3rd, 2007 at 8:16 am
7रो रहा हूँ देखकर, सूखे हुए उस ताल को,
आँसूओं की धार से, कुछ तो नमीं हो जायेगी!!
-भूत-भविष्य उसी पानी से डूबते भी हैं और सिंचते भी हैं. बस मात्रा(quantity) का फेर है, पंकज भाई.
राम प्रसाद ढीमर
February 17th, 2009 at 9:53 am
8रोना आखों के लिए अच्छा होता है, आँखों का स्नान हो जाता है।
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