विलियम कामक्वाम्बा मालावी में रहने वाले एक 19 वर्षीय युवक का नाम है। जिस जगह वह रहते हैं वहाँ बिजली नहीं आती। अभी तक उनके घर पर रात में रोशनी के लिए मोमबत्ती का प्रयोग होता था। मोमबत्ती से निकलने वाले धूंए से उनकी बहन की सेहत पर भी असर पड़ रहा था। 14 साल की उमर में विलियम को लगा कि इस बारे में कुछ करना चाहिए। आप सोचिए ऐसी जगह जहाँ बिजली नहीं आती एक 14 साल का लड़का अकेले क्या कर सकता है। अपने यहाँ हिन्दुस्तान में भी कितने गाँव होंगे जहां बिजली नहीं आती और हम लोग सरकार की तरफ देखते रहते हैं। लेकिन विलियम हाथ पर हाथ रख कर बैठने वालों में से नहीं था। उसने स्वदेश देखे बिना ही एक शाहरुख वाला काम कर दिखाया और वे तो नासा में काम भी नही करते।

विलियम ने अपने पास की लाइब्रेरी में से खोजकर एक उर्जा पर पुस्तक निकाली -
Using Energy by Mary Atwater इस पुस्तक से उन्होंने पवन चक्की से बिजली बनाने के बारे में पढ़ा। बस फिर क्या था अपने लेखू ने काम शुरु किया। पीवीसी पाईप व लकड़ी से बने चार पंखें (पुस्तक में तीन थे पर ज्यादा शक्ति की जरुरत थी इस लिए तीन की बजाए चार), साईकल व डायनेमो से बना जनरेटर व लीजिए विलयम के घर में चार बल्ब व रेडियो चल पड़ा। सही में योग्यता रंग, उमर, स्थान से जुड़ी नहीं होती। लगन हो तो असंभव कार्य हो जाते हैं।
विलियम के इस कार्य के लिए उन्हें टैड-2007 में भाग लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। गौर कीजिए इस टैड कान्फ्रेंस की स्टेज पर दुनिया के बड़े बड़े सृजनकार, वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री आते हैं। एक उन्नीस वर्षीय युवा के लिए यहाँ आना काफी बड़ी बात थी। विलियम का टैड वाला विडियो आप नीचे देख सकते हैं।
7 Responses
vipul
अगस्त 4th, 2007 at 9:28 am
1प्रेरित करने वाला लेख
ज्ञानदत्त पाण्डेय
अगस्त 4th, 2007 at 10:04 am
2बहुत प्रेरक! मलावी जैसे देश में!
उन्मुक्त
अगस्त 4th, 2007 at 12:48 pm
3हां हैं तो स्वदेश वाले असली शारूख।
Debashish
अगस्त 4th, 2007 at 7:32 pm
4बहुत बहुत अच्छा विडियो! मैंने स्वदेश कई बार देखी है और न जाने क्यों हर बार मेरी आँखें इस फिल्म को देख कर भीग जाती हैं, खास तौर पर उस दृश्य में जब शाहरुख अपनी दाईमाँ के कहने पर किसी किसान से ज़मीन का किराया लेने जाते हैं। इस विडियो ने मेरे खुशी के आंसू निकाल दिये, इंसां चाहे तो क्या कुछ नहीं कर सकता और इस युवक ने तो अपने समुदाय को वो दिया है जो मिलियन बिलियन डालरों से भी नहीं होता। इसके पहले तुमने एक विडियो और रखा था, जो इस बारे में था कि कैसे हमारी शिक्षा पद्धति बच्चों की मौलिकता छीन लेती है वि भी बढ़िया लगा था।
श्रीश शर्मा
अगस्त 4th, 2007 at 7:45 pm
5प्रशंसनीय और प्रेरक कार्य।
जीतू
अगस्त 4th, 2007 at 9:10 pm
6ग्रेट!
काश! भारत मे भी ऐसे विलियम्स होते।
pramod singh
अगस्त 5th, 2007 at 11:16 pm
7सही है.
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