लोजी अब पक्का हो गया। टीवी से भारत की ग्रामीण महिलाओं का बहुत विकास हो रहा है। अब यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो की एमिली ऑस्टर तो यही कहती हैं। उन्होंने एक रिसर्च पेपर प्रकाशित किया है जिसका नतीजा यही है कि – भारत में गाँवों में केबल टीवी लगने के बाद
आप पूरा पेपर यहाँ से पढ़ सकते हैं। आप इस से कितने सहमत / असहमत हैं कमेंट द्वारा जरूर बतावें।
ग्रामीण महिलाओं के ऊपर तो एमिली जी ने पेपर लिख दिया पर शहरी महिलाओं की जिंदगी के ऊपर फर्क पर भी बात होनी चाहिए। अभी तो घरों में रोटी सीरियलों के टाइम के हिसाब से पकती है। दूसरी तीसरी के बच्चे पूछते हैं कि पापा पापा आप मम्मी को कब डाईवोर्स दोगे इत्यादि।
साभार – मारजिनल रेवोलुशन
5 Responses
आलोक
August 10th, 2007 at 10:22 am
1पूरी गणित के साथ शोध किया दिखता है। ‘औरतों के प्रति’ घरेलू झगड़े – यानी औरतों की मारपीट ही न? अनुवाद में शायद बात ठीक से नहीं प्रकट हुई।
वैसे इस बात पर भी शोध होना चाहिए कि शहरों में जाल के इस्तेमाल से क्या सामाजिक बदलाव आ रहे हैं।
pankaj
August 10th, 2007 at 12:48 pm
2आलोक भाई
अभी शहरों में इतने कम्पयूटर तो न आए होंगे कि सामाजिक बदलाव ला सकें। टीवी जितनी पहुंत कम्पयूटर की पहुचनें में तो शायद अभी समय लगे।
पंकज
आलोक
August 10th, 2007 at 6:08 pm
3क्या हाँ भाई की मौत हो चुकी है?
उन्मुक्त
August 10th, 2007 at 7:28 pm
4टीवी जहां पहुंचा है वहां सोच में बदलाव आया है – यह जरूरी नहीं कि बदलाव ठीक दिशा में हो।
Pankaj Jha
October 4th, 2007 at 12:08 am
5i saw your site in Rajasthan patrika. I like it, please keep it up and i gave regular comments in this matter. I want do somthing, if u want some help please feel free for contact me,
with best complements,
Pankaj Jha
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