कॉलेज के जमाने में होस्टल की मैस में शनिवार को नाश्ते में मूली के पराँठे मिलते थे। उस समय दोस्तों से मजाक में कई बार इस बात पर मनन होता था कि यदि हम बहुत सारे पराँठे खा लें और इसके बाद जो होता है थोड़े थोड़े अंतराल पर होने की बजाए अगर एक सार एक के बाद एक हो तो क्या आदमी भागता नजर आएगा।
वह मजाक की बात थी लेकिन फ्राँस की एक कम्पनी ऐसा कर भी दिया है, न न आदमी पर नहीं बल्कि कार पर। कार के पेट में कम्प्रेस्ड हवा भरी होगी व गाड़ी इस हवा के फैलने से चलेगी। क्या मजेदार बात है। न कोई धूंआ न प्रदूषण। अधिक जानकारी आप एम डी आई कम्पनी के सजाल से पा सकते हैं। मजे की बात है कि टाटा वालों का इनके साथ अनुबन्ध भी है। अभी आप कह सकते हैं कि मेरी कार हवा से चलते हुए हवा से बातें करती है।
छवि साभार - http://www.theaircar.com/models.html
4 Responses
सारथी-अवलोकन: 2 : सारथी
मई 28th, 2007 at 9:02 pm
1[…] खबर, विदेशीहवा से चलती गाडी […]
Amit Gupta
जून 1st, 2007 at 11:42 am
2हुम्म, एकाध महीना पहले ओवरड्राईव के अंक में देखी थी यह गाड़ी। दिमाग तो सही लगाया है इन लोगों ने, देखने की बात है कि इसका कोई भविष्य भी है कि नहीं।
Pooja
जून 6th, 2007 at 3:56 pm
3Interesting blog you have here - it was refreshing to read hindi after such a long time
Talking about the car, so now people don’t need to steal gasoline from anybody’s fuel tank. If the car is out of air, they can just steal compressed air from the tyres from other cars in the parking lots to drive their own car.
Or they can use the air from the spare tyre.
ज्ञानदत्त पाण्डेय
जून 10th, 2007 at 9:49 pm
4एम.डी.आई. के फण्डे पर मैने शेखचिल्ली की ढ़ेर सारी कल्पनायें कर रखी हैं. पर ये गाड़ी तो चलने का नाम नहीं ले रही.
वैसे मजा आयेगा जब यह चलेगी हमारी सड़कों पर और पैट्रोल स्टेशन की बजाय कम्प्रेस्ड एयर स्टेशन होंगे.
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