पिछली अगस्त में टाटा वालों ने अपनी दूकान का सामान बढ़ाने के लिए यही कुछ 677 मिलियन डालर (2700 करोड़ रुपए से भी ज्यादा) में यहाँ अमरीका की ग्लेस्यू एक रसीला (विटामिन वाला) पानी बनाने वाली कम्पनी का करीब एक तिहाई हिस्सा खरीद लिया था। टाटा वालों का मानना था कि इस से एक तो दूकान का सामान बढ़ेगा व यह खरीद लम्बी दौड़ का घोड़ा साबित होगा।
पर इधर अपनी कोका कोला वाले भी दूकान में सामान बढ़ाना चाहते हैं और घोड़े तो उन्हें भी चाहिए। इनकी नजरें भी ग्लेस्यू पर गढ़ गई व टाटा वालों ने तो एक तिहाई खरीदी थी इन्होंने कल इसे पूरी की पूरी 4.1 बिलियन डालर में खरीद ली।
सोचिए टाटा वालों को उनके एक तिहाई हिस्से का मिलेगा 1200 मिलियन डालर यानि 4800 करोड़ से भी ज्यादा। वाह वाह पूरे 2100 करोड़ का फायदा सिर्फ 9-10 महीनों में।
7 Responses
Amit Gupta
मई 26th, 2007 at 11:27 am
1अरे सेठजी, यह खबर तो शनिवार के हिन्दुस्तान टाईम्स के पहले पन्ने पर सबसे ऊपर बड़े हर्फ़ों में छपी थी!! वाकई, टाटा वालों को इससे कोई लाभ होता नज़र नहीं आ रहा था क्योंकि इस कंपनी का प्रदर्शन कुछ खास नहीं था पिछले एक वर्ष में, और अब देखो, सोने का भाव मिल गया!!
समीर लाल
मई 26th, 2007 at 2:16 pm
2वाह, क्या कमाई की है.
kakesh
मई 26th, 2007 at 5:28 pm
3अच्छी खबर है.ऎसे ही कुछ अवसर हम चिट्ठाकारों के लिये भी लेकर आइये सेठ जी.
ज्ञानदत्त पाण्डेय
मई 26th, 2007 at 6:25 pm
4सी एन बी सी वाले उदयन मुखर्जी से पूछिये. उन्होनें टाटा के इस इंवेस्टमेंट को लेकर कहा था कि टाटा ने इसके पहले ड्यू डिलिजेंस भी कैरी आउट किया है या नहीं? ये हैं इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट!
pankaj
मई 26th, 2007 at 6:54 pm
5@अमित गुप्ता : गुप्ता जी कम्पनी पब्लिक नहीं है इसलिए उसके फंडामेंटल्स नहीं देख सकते व नहीं कह सकते कि टाटा को इस से कुछ फायदा हुआ कि नहीं। पर कोका कोला वालों ने भी कुछ तो देखा होगा
@ज्ञानदत्त पाण्डेय: महाराज मीडिया वाले विज्ञापन के धंधे में है। अब लोगों को स्टाक्स के बारे में सुनना, देखना अच्छा लगता है तो कोई तो बंदा चाहिए जो यह बात कर सके। तो उदयन क्यों नहीं। वैसे मैंने कभी उदयन को सुना नहीँ मैं सिर्फ मीडिया की ही बाद कर रहा हूँ
जीतू
मई 26th, 2007 at 8:58 pm
6ताऊ तो पैसे गिनते ही रह गए!
बहुत सोचा था कि पैसे लगाएंगे, पैसे कमाएंगे। बहुत दिनो बाद इन्फ़ोसिस मे लगाया, अब उसका शेयर भी बैठ गया। अब ब्लू चिप का ये हाल है तो हम बेचारे कहाँ जाएं?
pankaj
मई 26th, 2007 at 9:09 pm
7जीतू भाई
लगाना बुरा है। रोज रोज तो ना ही लगाओ बेहतर। कुछेक लम्बी दॉड़ के घोड़े पकड़ कर बैठ लो पर आज की तारीख में तो भाई लोगो ने आग लगा रखी है और लम्बी दौड़ के घोड़े पकड़ना बहुत मुश्किल।
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