ऊपर वाली छवि है टाईम्स ऑफ इंडिया के पुराने सजाल की। यह पन्ना प्रथम पृष्ठ होता था, टाईम्स ऑफ इंडिया को पढ़ने छोड़ने के कारणों में से बहुत बड़ा कारण इनका यह थीम भी था। जब भी इसे देखता रक्तचाप बढ़ जाता, दिल धौकनी की तरह भागता। यदि आप अभी भी यह देखना चाहते हैं तो इस कड़ी पर क्लिकावें।
खैर आज कल नव-सृजन की बातें होती हैं। टी ओ आई की वेब टीम का बल्ब भी जला व उन्होंने एकदम चकाचक रंगरोगन करके नए अभिकल्प (थीम) के साथ सजाल निकाला है जो कि वाकई काबिले तारीफ है। जरा एक नजर फरमाईए
यदि आप भी मेरी तरह इस साजो-सज्जा में रूचि रखते हैं (जैसे कि बैंगाणी बंधू) तो आप देखेंगे कि
अगर कम शब्दों में कहें तो बहुत सुंदर अभिकल्प है व वेब-टीम बधाई की पात्र है। साथ ही मैनेजमैंट की भी दाद देनी होगी जिन्होंने कम विज्ञापन वाले अभिकल्प को बनने दिया। कुछ समय पहले न्यूयार्क टाईम्स ने भी अपना स्वरुप बदला था व यह काफी चर्चा में रहा था। उस समय जिन बातों का ध्यान रखा गया था लहभग सभी यहां नजर आती हैं। इस बारे में अनिल डैश ने व न्यूयार्क टाईम्स के नए रंगरोगन मैनेजर ने यहाँ लिखा था
जाते जाते मिर्ची सेठ स्पेशल - जरा नीचे दी गइ वाशिंगटन पोस्ट की छवि पर निगाह डालिए लगता है टी ओ आई वालों की प्रेरणा में यह रही होगी
बोनस बात - श्याम बाबू ने भी इस बारे में लिखा था व वहां से पता चला कि सभी बिरादरी वालों - टी ओ आई, एच टी, एन डी टी वी, व इंडियन एक्सप्रैस सभी ने नया स्वरूप अपनाया है। सबसे घटिया बात हिन्दूस्तान टाईम्स वालों ने न्यूयार्क टाईम्स वालों की पूरी की पूरी कापी मार दी है।
8 Responses
pankaj Bengani
अप्रैल 29th, 2007 at 9:42 pm
1मुझे हिन्दुस्तान टाइम्स के नए संजाल की डिजाइन एकदम बेकार लगी
मैथिली
अप्रैल 29th, 2007 at 9:42 pm
2आपकी यह प्रविष्टि मेरे बहुत काम में आयेगी.
pankaj
अप्रैल 29th, 2007 at 9:49 pm
3पंकज भैया
आपने टाईम्स ऑफ इंडिया के डि़जाइन के बारे में नहीं बताया
पंकज
हरिराम
अप्रैल 30th, 2007 at 2:37 am
4इसे और भी compact होना चाहिए। जैसे एक मिनट में ही पाठक दुनिया भर की प्रमुख खबरें संक्षेप में तत्काल पढ़ सके और जहाँ चाहे वहाँ विस्तार में जड़ तक जाए। BBC style जैसी, कड़ी से कड़ी जोड़कर जड़ खोदकर पाताल तक की सूचनाएँ देने की कला तो शायद किसी और में नहीं।
श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'
अप्रैल 30th, 2007 at 8:54 am
5हम्म वाकई नया स्वरुप बेहतर है। अब क्या कहें कई न्यूजसाइटें ऐसी हैं कि कुछ पढ़ने का मन ही नहीं करता।
फ्लुइड खाका क्या होता है जी ?
राजीव
अप्रैल 30th, 2007 at 1:14 pm
6श्रीश जी,
फ्लुइड खाका, वह अभिकल्प होता है, जिसमें जाल-पृष्ठ, ब्राउज़र की उपलब्ध चौड़ाई के अनुसार अपने पृष्ठ के संयोजन को समायोजित कर लेता है।
मोहम्मद कासिम
मई 1st, 2007 at 6:59 pm
7ब्लाग अच्छा हे
yogesh sharma
जून 12th, 2007 at 9:16 am
8यह ब्लोग कफ़ी जानकारी पूर्ण है। विभिन्न वेब साइट्स का तुल्नात्मक अध्ययन मुझे बहुत अच्छा लगा। आपको इस लेख के लिये धन्यवाद।
RSS feed for comments on this post · ट्रैकबैक URI
Leave a reply
श्रेणियाँ
प्रविष्टियाँ
अन्य हिन्दी चिट्ठे
कड़ियाँ
स्वागतम्
टिप्पणियाँ
Meta
मिर्ची सेठ is proudly powered by WordPress - BloggingPro theme by: Design Disease