मुन्ने की माँ राज मां बनाती है, रत्ना की रसोई तो नित नए पकवान बनाती है पर अपने राम तो चाय ही बनाते हैं। अक्षरग्राम की शुरुआत में जब यहाँ कैलीफोरनिया में रात काली की जा रही होती थी तो जीतू भाई के कुवैत में दिन होता था व उस समय वह जीमेल चैट द्वारा अपनी टिप्स दिया करते थे। तो लीजिए प्रस्तुत हैं मिर्ची सेठ की चाय लैब
ऊपर दिखाए गए उपकरणों व सामान की सूची (बाएं से दांए)
1. चाय का कप ( इन कपों से मन भर गया है व नए लेने हैं पर यहाँ अमरीका में देस वाले साइज के कप नहीं मिलते। ये लोग कॉफी के प्यासे हैं व इसीलिए बाजार में कॉफी के बड़े बड़े मग साइज के कप मिलते हैँ। बुरा हो मुए अंग्रेजों का जिनकी वजह से बॉस्टन टी पार्टी के बाद अमरीकी लोग कॉफी पीने लगे)
2. चीनी का स्टील का डिब्बा। एक मित्र ने शादी की पिछली सालगिरह पर दिया था।
3. बरकले फॉर्म वालों का दूध हैप्पी काउज कम फराम कैलिफोरनिया। स्वामी जी के सांड की गाय हैप्पी नहीं होती अगर विश्वास नहीं होता तो यह वीडियो देख लें –
http://www.youtube.com/watch?v=1GzEhDZFO6c
4. इलायची पीसक यंत्र – यदि आप इटालियन या फ्रेंच रेस्तरां में जाएंगे तो वे आपको काली मिर्च किसी ऐसे ही यंत्र में पीस कर खाने के ऊपर से छिड़कते हैं। अपुन को यह जुगाड़ स्विस आईकिया नामक दुकान पर मिल गया। काम इसका भी काली मिर्च पीसना है पर बेचारा आजकल देसियो के घर में इलायची पीस पीस कर लौंगा इलायची का बीड़ा लगाया गाता फिरता है।
5. चाय का स्टील का डिब्बा - ऊपर वाले चीनी के डिब्बे का सहोदर है।
6. अदरक कुतरने का श्रीमती जी की भाषा में स्वीट सा यंत्र – इसे अपने यहां सनीवेल में 220 वोल्ट का बिजली का सामान बेचने वाले लाला कुसुम इलेक्ट्रॉनिक्स से दो डॉलर में खरीदा था। यहाँ 110 वोल्ट बिजली प्रयोग होती है इसलिए 220 वोल्ट वाले उपकरण कम मिलते हैं पर छुट्टियों में बंधू लोग जब इंडिया जाते हैं तो यहाँ से माइक्रोवेव, राइस कुकर इत्यादि खरीद के ले जाते हैं। लाला जी भी इस बात का खूब फायदा उठाते हैं व वोलटेज के साथ दाम भी दुगने करके बेचते हैं।
7. अदरक की फांक। अदरक में बहुत गुण हैं पर अपना धंधा मिर्ची का है इसलिए नहीं बताउंगा।
8. देस से बंटी स्टील भंडार से बाहरह रुपए पचास पैसे में खऱीदी गई छलनी
9. बंटी स्टील भंडार से लिया गया चाय का बर्तन। हैंडिल टूट गया है व रसोई वाले तौलिए से पकड़कर चाय डालनी पड़ती है।
10. चुल्हा अपार्टमेंट वालों का है व बिजली से चलता है। कमीने अपार्टमेंट वाले घर खाली करते समय चुल्हा गंदा हो गया है कह कर सिक्यूर्टी से पैसे काट लेते हैं। हाऊ मीन।
17 Responses
समीर लाल
April 9th, 2007 at 5:16 pm
1notepad
April 9th, 2007 at 6:24 pm
2बहुत मज़ेदार और क्रिएटिव ।
बडे बडे सवालों से थक कर इस तरह की बातं पढना अच्छा लगता है।
विदेश मे देश कैसे याद आता है ,इसकी झलक है ।
अनूप शुक्ला
April 9th, 2007 at 6:45 pm
3जब चाय का सारा सामान सामने हो तो इस तरह की बातें मिर्ची सी लगती हैं। अरे चाय बनाऒ, पिलाऒ। तब कुछ बात बने!
pankaj
April 9th, 2007 at 6:58 pm
4शुक्ला जी,
अगर देखें तो चुल्हा जल रहा यानि कि लाल रंग में है, चाय जरा पक रही है। एक उबाला आने दीजिए फिर परोसेंगे। कमबख्त कप सिर्फ एक है अब देखिए किस के नसीब में है इलायची अदरक वाली चाय।
मजे की बात इस फोटो के चक्कर में चाय उबल उबल कर काली हो गई थी दूबारा से हैप्पी काउज ऑफ कैलिफोर्निया का दूध डालना पड़ा।
पंकज
उन्मुक्त
April 9th, 2007 at 6:59 pm
5मुन्ने की मां के अमेरिका में पढ़ाने के प्रवास के दौरान, मैंने भी कुछ समय वहां गुजारा। कुछ वहीं की यादें ताजा हो गयी।
प्रत्यक्षा
April 9th, 2007 at 8:25 pm
6अब बनी हुई चाय भी दिखा दीजिये ,फिर रेटिंग की जायेगी
aroonarora
April 9th, 2007 at 8:41 pm
7बहुत बुरी आदत है पंकज भाई खुद अकेले अकेले चाय की चुस्की मार रहे हो हमे जलाने के लिये फ़ोटो दिखा रहे हो ये मिर्ची लगाने की नई नई तरकीबे कहा से लाते हो तुरन्त क्रेडिट कार्ड से ३ रुपये के जितने सेन्ट बनते हो मेरे एकाउन्ट मे डाल दो हम यही पी लेगे
आशीष
April 9th, 2007 at 8:52 pm
8मिर्ची सेठजी,
चाय बन गयी क्या ?
SHUAIB
April 9th, 2007 at 9:30 pm
9सच पूछो तो ये लेख चाय पीते पढ रहा था – बहुत मज़ा आया
pankaj बेंगाणी
April 9th, 2007 at 9:55 pm
10कब आऊँ चाय पीने.. मै रसीया हुँ…
संजय बेंगाणी
April 9th, 2007 at 10:55 pm
11बर्तन- भांदे ही गिनाते रहे, चाय कैसी बनी, नहीं बताया.
एक ही पेय है जो चाव से पीते हैं. चाय…चाय…चाय.
लैब साधन सम्पन्न है, पीलाओ चाय.
ई-स्वामी » मेरी चाय लैब भी देखो भई!
April 9th, 2007 at 11:49 pm
12[...] सेठ की चाय-लैब वाली पोस्ट देख कर मजा, हंसी भी [...]
rachana
April 10th, 2007 at 12:11 am
13बढिया है!खालिस देसी चाय लैब!
eswami
April 10th, 2007 at 12:35 am
14http://hindini.com/eswami/?p=131 ha ha!
Jitu
April 10th, 2007 at 2:11 am
15hmm! saari commentary likh diye ho.
Eswami to apna Kitchen online launch kar diya hai,
hum bhi apna Fotu publish karibe, lekin aaj nahi, abhi 2 din baaki hain, course khatam hone ke baad.
ratna
April 10th, 2007 at 11:53 pm
16I am impressed with your cooking..ah..tea making.smells good. well done, congrats.
श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'
April 11th, 2007 at 4:29 am
17अरे सेठ जी इन्ने बड़े टैकी हो, इंटरनेट से जरा यहाँ भी चाय भेजने का बंदोबस्त करो, खाली फोटू दिखाकर काहे जला रहे हो।
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