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	<title>Comments on: बात पैसे की नहीं नव-सृजन की थी</title>
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	<description>मिर्ची सी जिंदगी, कभी मंदी कभी तेज</description>
	<pubDate>Fri, 16 May 2008 03:04:22 +0000</pubDate>
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		<title>By: टाईम्स ऑफ इंडिया का नया रंग रोगन &#124; मिर्ची सेठ</title>
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		<author>टाईम्स ऑफ इंडिया का नया रंग रोगन &#124; मिर्ची सेठ</author>
		<pubDate>Mon, 30 Apr 2007 03:19:10 +0000</pubDate>
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		<description>[...] आज कल नव-सृजन की बातें होती हैं। टी ओ आई की वेब टीम [...]</description>
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		<title>By: अरुण</title>
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		<author>अरुण</author>
		<pubDate>Sun, 29 Apr 2007 02:18:13 +0000</pubDate>
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		<description>प्रिय पंकज जी वाकई मे आप की बात तब लोग नही समझ पाये थे आपका कहना सही है २००४/५ मे भारत मे फ़्रिज उत्पादन का ५०से५५% हिस्सा मेरे उत्पाद को प्रयुक्त कर बनता था तब हम दो लोग ही मैदान मे थे और अब चाइना के सबसीडाईज्ड उत्पाद के आने पर यह घट कर ४०% रह गया है जबकी उतपादन तब से २०% बढ गया है लेकिन हर जगह नव सृजन न्ही हो सकता मूलता प्रयुक्त होने वाले कच्चे माल की कीमते आसमान छू रही हो बिजली., श्रम शक्ति , हर चीज के दाम बढने पर यहा दम टूटने के अलावा और कुछ नही होगा क्योकी भारत मे अब मेटल के रेट विश्व के साथ बढ घट रहे है और चाईना अपने उतपादको को २८% सबसिडी दे रहा है तो कहा से होगी बराबरी</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>प्रिय पंकज जी वाकई मे आप की बात तब लोग नही समझ पाये थे आपका कहना सही है २००४/५ मे भारत मे फ़्रिज उत्पादन का ५०से५५% हिस्सा मेरे उत्पाद को प्रयुक्त कर बनता था तब हम दो लोग ही मैदान मे थे और अब चाइना के सबसीडाईज्ड उत्पाद के आने पर यह घट कर ४०% रह गया है जबकी उतपादन तब से २०% बढ गया है लेकिन हर जगह नव सृजन न्ही हो सकता मूलता प्रयुक्त होने वाले कच्चे माल की कीमते आसमान छू रही हो बिजली., श्रम शक्ति , हर चीज के दाम बढने पर यहा दम टूटने के अलावा और कुछ नही होगा क्योकी भारत मे अब मेटल के रेट विश्व के साथ बढ घट रहे है और चाईना अपने उतपादको को २८% सबसिडी दे रहा है तो कहा से होगी बराबरी</p>
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