अम्बाला में पला बढ़ा हूँ व सिक्खी से बहुत करीबी नाता है। फ्लिकर पर रमिंदर की छवियाँ देखी कमाल की हैं। एक युवा निहंग दो घोड़ों पर अपना कौशल प्रदर्शित करते हुए। रमिंदर की फोटो उस से भी कमाल की है। भागते घोड़ों की शक्ति के बारे में सोचिए, युवा निहंग के दिमाग में इस समय क्या होगा। अधिक जानकारी इस कड़ी पर

7 Responses
Amit Gupta
अक्तूबर 29th, 2006 at 3:00 am
1घोड़े दमदार लगते हैं तो वाकई गति काफ़ी होगी। वैसे “निहंग” कौन होता है पंकज भाई? अपने को अधिक ज्ञान नहीं इस बारे में।
पंकज
अक्तूबर 29th, 2006 at 12:58 pm
2अमित
निहंग सिक्खों में एक समुदाय है जो पुराने समय में अपने सेना कौशल के लिए जाना जाता था। कहते हैं कि गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने बेटे को नीले कपड़े पहना कर निंहग समुदाय की शुरुआत की थी। आजके नए जमाने में एक अलग सैना की जरुरत तो नहीं पर इतिहास को जिंदा रखते हुए सिक्ख बंधुओं में से कई निहंग बन जाते हैं। अधिक जानकारी विकीपीडिया पर।
http://en.wikipedia.org/wiki/Nihang
संजय बेंगाणी
अक्तूबर 29th, 2006 at 9:34 pm
3जानकारी देने के लिए आभार. वैसे मुझे यह तस्वीर बहुत पसन्द आई, कमाल की ली हैं.
SHUAIB
अक्तूबर 29th, 2006 at 9:41 pm
4जानकारी देने के लिए आपका धन्यवाद
किसी पंजाबी टीवी चैनल पर ये देख चुका हूं
पूनम
दिसम्बर 22nd, 2006 at 10:05 pm
5बहुत ही जीवंत और शक्तिशाली तस्वीर है.निहंगों के विषय में जानकारी का धन्यवाद.
श्रीश । ई-पंडित
दिसम्बर 24th, 2006 at 1:47 am
6पंकज जी, कृपया साइडबार में Catergory, Archives आदि के Widgets डालें। आपकी पुरानी पोस्टें पढ़नी थी।
anilsinha
दिसम्बर 30th, 2006 at 2:36 am
7चित्र वास्तव में बहुत सुन्दर है, किस फोटोग्राफर द्वारा का कमाल है यह।
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