आज कल यहाँ सिलीकन वैली या कहें सैन होज़े में गर्मी काफी पड़ रही है। आज शनिवार था व हर अच्छे पत्नीभगत देसी पति की तरह मैं अपनी प्रिया के साथ ग्रेट मॉल में घूम रहा था। खरीदा कुछ नहीं बस यूं ही घूम कर आ गए। वापिस आया तो गर्मी में दिल मांगे मोर की तरज पर मन में बीयर पीने की तीव्र कामना उत्पन्न हूई। इसकी शांति के लिए फ्रिज देव से एक ठंडी बीयर निकाली। पर भाग्य में कुछ और ही लिखा था। वह कुछ ज्यादा ही ठंडी निकली। अब जब बीयर चाहिए तो बीयर चाहिए। कोंच कोंच कर निकालनी पढ़ी। जर्मनी में जन्मी इस बीयर के भाग्य में अमरीका में देसी के हाथों गले में चम्मच डलवाना लिखा था अब क्या कहें आप भी देखें कैसे जमी पड़ी है

7 Responses
जीतू
अगस्त 12th, 2006 at 11:20 pm
1इसका मतलब ये हुआ कि बहुत दिनो से आपने बीयर को हाथ नही लगाया। तभी वो नाराज होकर बर्फ़गीन हो गयी।
आलोक
अगस्त 13th, 2006 at 9:45 am
2हे मिर्ची सेठ, इस तस्वीर को परिवार वाले, महिलाएँ, और बच्चे देखेंगे तो उनपर क्या असर पड़ेगा!
पंकज नरुला
अगस्त 13th, 2006 at 1:48 pm
3ओहो इ सोचा तो था पर सोचा की फरक पैंदा है।
ratna
अगस्त 13th, 2006 at 9:27 pm
4नल के बहते पानी के नीचे पाँच मिनिट छोड़ देते तो शायद इतनी मेहनत न करनी पड़ती ।
संजय बेंगाणी
अगस्त 14th, 2006 at 1:30 am
5“नल के बहते पानी के नीचे पाँच मिनिट छोड़ देते तो शायद इतनी मेहनत न करनी पड़ती”
रत्नाजी यह तो देशी जुगाड़ हुआ. भाई को कुछ ‘प्रोग्रामिंग से कैसे पिघाले’ बताती तो ज्यादा समझमें आता.
रवि
फरवरी 27th, 2007 at 11:43 pm
6ओह तो यह कोंची गई बीयर का असर है जिसने आपको शीतनिष्क्रियता से बाहर निकाला और क्या निकाला - दनादन कई पोस्टें!
यही गति बनाए रखें. शुभकामनाएँ.
रवि
फरवरी 27th, 2007 at 11:45 pm
7अरे! मैं ब्लॉगर बग का शिकार हो गया!
माफ कीजिएगा. बाद में तारीखें दिखीं! वह भी टिप्पणियों में!
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