फोंट युनिकोड हैं पर हमारे कामके नहीं, फिलहाल डिजाइनिंग के सोफ्टवेर जो हम प्रयोग में ला रहे हैं, युनिकोड का समर्थन नहीं करते.
भारत सरकार द्वारा जारी की गई हिन्दी की सीडी अपने पास भी हैं, जिसे दबा के रखा हैं. कभी न कभी तो काम में आयेगी ही.
भारत सरकार के द्वारा प्रकाशित फौन्ट मुफ्त हैं पर मुक्त नहीं। यानी कि वे न तो copylefted न ही GPL के अन्दर प्रकाशित किये गये हैं। सरकारी CD के मुताबिक यह सब उनके कौपी राईट हैं जिन्होने इन्हे बनाया है। CD में IIT Hyderabaad ने अपने प्रोग्राम के terms लिखें हैं कि वह केवल personal use के लिये है पर CDAC या किसी और ने अपने कौपी राईट के terms नहीं लिखे हैं। लोहित हिन्दी और गार्गी यूनिकोड पर हैं। यह copylefted हैं और GPL के अन्दर प्रकाशित की गयी हैं।
सरकारी सीडी तो अपने पास भी है और जब अपने ने उसे अपने कंप्यूटर पर लोड करवाया तो पूरे कंप्यूटर की आंतरिक संरचना धाराशायी हो गई, सुधारने वाले को वुलाया तो उसने नसीहत दी कि किसी भी सरकारी चीज का कंप्यूटर पर कभी उपयोग मत करना क्योंकि सरकार और सरकारी अधिकारी जो भी करते हैं उनके भले के लिए करते हैं आपके लिए नहीं…हाँ जैसे ही उस सीडी को अपने कंप्यूटर से हटाया काम बढिया चल रहा है। सरकारी अधिकारिंयों, मंत्रियों और सीडैक वालों को खूब मेल भेजे कि भई आपने ये क्या बनाया है, मगर कोई जवाब नहीं….तो बेहतर है हम अपने अपने स्तर पर ही हिदी की सेवा करते रहें सरकार के भरोसे नहीं रहें..जिस सरकार का प्रधानमंत्री अपने देश में हिंदी वोलने में शर्म महसूस करे, उस सरकार से कोई उम्मीद नहीं करना चाहिए।
मिर्ची सेठ, पंकज नरुला का निजी ब्लॉग है। अम्बाला में जन्म हुआ व शिक्षा चंडीगढ़ से प्राप्त की। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिग करने के बाद कुछ समय दिल्ली में काम किया। आजकल सैन होज़े में एक एस ए पी कंस्लटिंग कम्पनी में काम करता हूँ।
8 Responses
आशीष
जुलाई 10th, 2006 at 8:34 pm
1पंकज भाई
मेरे तिन सवाल
१. क्या ये सभी UTF फांट हैं ?
२. इन्हे कहां से प्राप्त किया जा सकता है ?
३. क्या ये मुफ्त है या व्यवसायीक हैं ?
रवि
जुलाई 10th, 2006 at 8:39 pm
2मेरे खयाल से फ़ॉन्ट यूनिकोड तो हैं परंतु मुक्त व मुफ़्त नहीं हैं.
pankaj
जुलाई 10th, 2006 at 11:27 pm
3सभी के सभी यूनिकोड हैं। ये सभी फॉन्ट भारत सरकार द्वारा जारी की गई हिन्दी की सीडी से लिए गए हैं। उस का पता ये रहा
http://ildc.gov.in/htm/otfonts.htm
जिनका उदाहरण मैंने दिया है वे सभी CDAC वाले हैं। इनके लाइसेंस के बारे में सीडैक वालों ने चुप्पी साधी है। किसी को पक्का पता चले तो बतावें।
पूरी सी़डी यहाँ पर है
http://ildc.gov.in/hindi/hdownloadhindi.htm
संजय बेंगाणी
जुलाई 11th, 2006 at 2:38 am
4फोंट युनिकोड हैं पर हमारे कामके नहीं, फिलहाल डिजाइनिंग के सोफ्टवेर जो हम प्रयोग में ला रहे हैं, युनिकोड का समर्थन नहीं करते.
भारत सरकार द्वारा जारी की गई हिन्दी की सीडी अपने पास भी हैं, जिसे दबा के रखा हैं. कभी न कभी तो काम में आयेगी ही.
उन्मुक्त
जुलाई 11th, 2006 at 3:17 am
5भारत सरकार के द्वारा प्रकाशित फौन्ट मुफ्त हैं पर मुक्त नहीं। यानी कि वे न तो copylefted न ही GPL के अन्दर प्रकाशित किये गये हैं। सरकारी CD के मुताबिक यह सब उनके कौपी राईट हैं जिन्होने इन्हे बनाया है। CD में IIT Hyderabaad ने अपने प्रोग्राम के terms लिखें हैं कि वह केवल personal use के लिये है पर CDAC या किसी और ने अपने कौपी राईट के terms नहीं लिखे हैं। लोहित हिन्दी और गार्गी यूनिकोड पर हैं। यह copylefted हैं और GPL के अन्दर प्रकाशित की गयी हैं।
Raman Kaul
जुलाई 11th, 2006 at 8:46 am
6copylefted? वह क्या होता है?
pankaj
जुलाई 11th, 2006 at 10:45 am
7!(copyright) = copyleft
Hindi premi
जुलाई 21st, 2006 at 10:19 pm
8सरकारी सीडी तो अपने पास भी है और जब अपने ने उसे अपने कंप्यूटर पर लोड करवाया तो पूरे कंप्यूटर की आंतरिक संरचना धाराशायी हो गई, सुधारने वाले को वुलाया तो उसने नसीहत दी कि किसी भी सरकारी चीज का कंप्यूटर पर कभी उपयोग मत करना क्योंकि सरकार और सरकारी अधिकारी जो भी करते हैं उनके भले के लिए करते हैं आपके लिए नहीं…हाँ जैसे ही उस सीडी को अपने कंप्यूटर से हटाया काम बढिया चल रहा है। सरकारी अधिकारिंयों, मंत्रियों और सीडैक वालों को खूब मेल भेजे कि भई आपने ये क्या बनाया है, मगर कोई जवाब नहीं….तो बेहतर है हम अपने अपने स्तर पर ही हिदी की सेवा करते रहें सरकार के भरोसे नहीं रहें..जिस सरकार का प्रधानमंत्री अपने देश में हिंदी वोलने में शर्म महसूस करे, उस सरकार से कोई उम्मीद नहीं करना चाहिए।
वंदे मातरम्
हिंदी प्रेंमी
मुंबई
RSS feed for comments on this post · ट्रैकबैक URI
Leave a reply
श्रेणियाँ
प्रविष्टियाँ
अन्य हिन्दी चिट्ठे
कड़ियाँ
स्वागतम्
टिप्पणियाँ
Meta
मिर्ची सेठ is proudly powered by WordPress - BloggingPro theme by: Design Disease