वैश्वीकरण के चलते दुनिया बहुत बदल रही है। आज ही बिजेनस वीक में एक अमरीका के लुसेनबर्ग के बारे में पढ़ा जिन्हें कैटरीना की तबाही के बाद मलबा हटाने के लिए ट्रैक्टर की जरुरत थी तो जब वे खरीदने गए तो लाऐ अपना महिन्द्रा ट्रैक्टर। है न मजे की बात। उन्हीं के शब्दों में (मूल अंग्रेजी से अनुवाद मेरा)
मैंनें सारी जिंदगी ट्रैक्टरों, मशीनों में गुजारी है। 27000 डॉलर में महिन्द्रा वाकई सबसे ज्यादा किफायती है। इसमें ज्यादा जोर व अच्छा भारी स्टील है। जब आप इसे फोर-व्हील-ड्राइव (चारों पहियों को एक साथ प्रयोग करना) में डालते हैं तो आप इससे 3000 पाउडं भी ऐसे ही खींच सकते हैं। एकदम भीम बराबर है।
और आप सोचते थे कि देस से केवल सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की बोरियां ही निर्यात होती हैं
साभार - बिजनेस वीक
6 Responses
उन्मुक्त
जुलाई 22nd, 2006 at 7:39 pm
1मैं तो समझता था कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के साथ केवल कपड़े भी निर्यात होते हैं यह पढ़ कर अच्छा लगा|
संजय बेंगाणी
जुलाई 22nd, 2006 at 9:04 pm
2लो बोलो अभी हालमें ही भारत में दो विदेशी कम्पनीयों के ट्रेक्टर बिकने लगे हैं तो हमे लगा हमारा माल हल्की गुणवता वाला होगा.
अनूप शुक्ला
जुलाई 22nd, 2006 at 9:11 pm
3सेठजी ये सिर्फ साफ्टवेयर निर्यात करने वाला सोच हमारा नहीं है,’निर्यातित साफ्टवेयर’ का ही है।
मितुल
जुलाई 22nd, 2006 at 9:38 pm
4टॉमबॉल, टेक्सास मे हमने महिन्द्रा का शो-रूम देखा है। और एक बार ह्युस्टन मे बजाज का स्कूटर भी। कडी के लिए धन्यवाद, अच्छी खबर है।
आशीष
जुलाई 23rd, 2006 at 8:43 am
5ये बताता है कि कल हमारा है !
pankaj
जुलाई 23rd, 2006 at 9:20 am
6कल (स्वर्णिम भूतकाल) भी हमारा था और कल भी हमारा होगा। इस ससुरे वर्तमान का क्या करें…
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