क्यूँकि फॉयरफॉक्स के गुणों के बारे में श्रृंख्ला लिख चुका हूँ इस लिए बनता है कि इसके बारे में फिर से लिखूँ। यदि उपरी तौर से देखा जाए तो आप कह सकते हैं कि केवल टैब्ड-ब्राउजिंग के लिए इतना हल्ला मचाना कहाँ तक लाजमी है। पर बात सिर्फ इतनी ही नहीं। इसका मुक्त-सोर्स व प्लगइन या एड-ऑन इसका सबसे बड़ा फायदा है।
पदमा - अब उदाहरण के लिए पदमा प्लगइन को लीजिए - पदमा जो कि सुषा व इसके जैसे कई अयूनिकोडित फांटों वाले सजालों को ऑन-द-फलाई यूनिकोड में बदल देता है। मैं बहुत दिन तक अभिव्यक्ति व अनुभूति पर जाता भी नहीं था पर पदमा की मदद से अब आराम से फॉयरफॉक्स में ही पढ़ता हूँ।
परफारमेंसिग - ऐसे ही एक और प्लगइन है परफारमेंसिग इसके जरिए आराम से मैं ब्राउजर में बैठे बैठे ही अपने चिट्ठों पर प्रविष्टियां प्राकशित करता हूँ।
स्विचप्राक्सी - एक और उदाहरण देता हूँ - कन्सलटेंट हूँ इसलिए अलग अलग कस्टमर के यहाँ जाना होता है हर जगह अलग अलग प्रोक्सी-सरवर होते हैं पहले हर जगह जाकर हर बार सेटिंग बदलनी पड़ती थी। फिर घर आकर फिर से बदलना पड़ता है। लीजिए इसका पंगा भी दूर किया एक प्लगइन ने नाम है स्विचप्राक्सी।
ग्रीज़मंकी - यह फॉयरफॉक्स सबसे विविध प्लगइन है। इसके प्रयोग से कुछ कार्य जैसे कि - याहू के पन्नों से एड गायब, जीमेल में और ज्यादा की बोर्ड शार्टकट, जब भी अमेजन पर कोई पुस्तक देखूं तो उसी पन्ने पर किताब के नाम के नीचे यह पुस्तक मेरी लोकल लाइब्रेरी में है कि नहीं के लिए संदेश जैसे कार्य किए हैं।
यह सूची तो बहुत लम्बी है पर आशा है कि मैं फॉयरफॉक्स की प्रसिद्धि के कारणों को बता पाया हूँ। प्रारंभिक जानकारी के लिए आप मेरे लेखों की कड़ियाँ
आईए फायरफॉक्स अपनाए - http://akshargram.com/nirantar/node/3
कड़ियाँ गरमा-गरम - http://akshargram.com/nirantar/0405/nidhi
शक्तिसर्च - http://akshargram.com/nirantar/0705/nidhi/02
आखिर में हिन्दी की मात्राओं वासी गलतियों वाला बग हम लोगों में काफी प्रसिद्ध है। इसे हटाने के लिए बगजिला पर जाकर इससे संबधित बग पर अपने वोट डालने चाहिए ताकि डेवलपर इस पर ध्यान दे सकें। शायद रवि रतलामी जी या आलोक इस पर अधिक प्रकाश डाल सकें।
One Response
उन्मुक्त
मई 29th, 2006 at 12:27 am
1जानकारी अच्छी है|
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