अंतर्जाल पर हिन्दी का प्रसार पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है। जहाँ आज से दो-तीन साल उंगलियों पर गिने जा सकने वाले हिन्दी सजाल थे वहीं आज यह संख्या सैंकड़ों में होगी। इस प्रसार में ब्लॉग-विधा का बहुत बड़ा हाथ है। सजाल पर हिन्दी पढ़ने लिखने व संबधित विषयों पर वार्ता के लिए बहुत से माध्यमों का प्रयास किया जा चुका है। इसी श्रंख्ला में एक और कदम है परिचर्चा। हिन्दी प्रेमियों का उत्साह इसी बात से नजर आता है कि गृह-प्रवेश यानि कि लाइव होने के तीन दिन के अंदर ही इस पर 40 के करीब प्रयोक्ता व लगभग 200 प्रविष्टियां की जा चुकी है।
इसे बनाने में कभी न सोने वाले अमित व हर दिल अजीज जीतू जी के प्रयत्न लगे हैं। इस के लिए उन्हें धन्यवाद व बधाई।
2 Responses
Hari mohan
जुलाई 22nd, 2006 at 11:31 pm
1पर ये परिचरचा मिलेगी कहाँ
pankaj
जुलाई 23rd, 2006 at 9:34 am
2हरी जी
जरा इस कड़ी पर देखें
http://akshargram.com/paricharcha
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