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	<title>Comments on: ब्लॉग विधा</title>
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	<description>मिर्ची सी जिंदगी, कभी मंदी कभी तेज</description>
	<pubDate>Sun, 06 Jul 2008 06:30:10 +0000</pubDate>
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		<title>By: परिचर्चा - चर्चाओं का गढ़ at मिर्ची सेठ</title>
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		<author>परिचर्चा - चर्चाओं का गढ़ at मिर्ची सेठ</author>
		<pubDate>Sat, 13 May 2006 19:30:19 +0000</pubDate>
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		<description>[...] अंतर्जाल पर हिन्दी का प्रसार पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है। जहाँ आज से दो-तीन साल उंगलियों पर गिने जा सकने वाले हिन्दी सजाल थे वहीं आज यह संख्या सैंकड़ों में होगी। इस प्रसार में ब्लॉग-विधा का बहुत बड़ा हाथ है। सजाल पर हिन्दी पढ़ने लिखने व संबधित विषयों पर वार्ता के लिए बहुत से माध्यमों का प्रयास किया जा चुका है। इसी श्रंख्ला में एक और कदम है परिचर्चा। हिन्दी प्रेमियों का उत्साह इसी बात से नजर आता है कि गृह-प्रवेश यानि कि लाइव होने के तीन दिन के अंदर ही इस पर 40 के करीब प्रयोक्ता व लगभग 200 प्रविष्टियां की जा चुकी है। इसे बनाने में कभी न सोने वाले अमित व हर दिल अजीज जीतू जी के प्रयत्न लगे हैं। इस के लिए उन्हें धन्यवाद व बधाई। [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[&#8230;] अंतर्जाल पर हिन्दी का प्रसार पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है। जहाँ आज से दो-तीन साल उंगलियों पर गिने जा सकने वाले हिन्दी सजाल थे वहीं आज यह संख्या सैंकड़ों में होगी। इस प्रसार में ब्लॉग-विधा का बहुत बड़ा हाथ है। सजाल पर हिन्दी पढ़ने लिखने व संबधित विषयों पर वार्ता के लिए बहुत से माध्यमों का प्रयास किया जा चुका है। इसी श्रंख्ला में एक और कदम है परिचर्चा। हिन्दी प्रेमियों का उत्साह इसी बात से नजर आता है कि गृह-प्रवेश यानि कि लाइव होने के तीन दिन के अंदर ही इस पर 40 के करीब प्रयोक्ता व लगभग 200 प्रविष्टियां की जा चुकी है। इसे बनाने में कभी न सोने वाले अमित व हर दिल अजीज जीतू जी के प्रयत्न लगे हैं। इस के लिए उन्हें धन्यवाद व बधाई। [&#8230;]</p>
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		<title>By: विनोद मिश्रा</title>
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		<author>विनोद मिश्रा</author>
		<pubDate>Tue, 11 Apr 2006 08:40:17 +0000</pubDate>
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		<description>ठीक नीचे वाली प्रविष्टी इस बात को और अछ्छी तरह से कहती है :) ब्लाग हमारे दिमाग का कूड़ा संग्रह करने का एक उत्तम स्थान है :D</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ठीक नीचे वाली प्रविष्टी इस बात को और अछ्छी तरह से कहती है <img src='http://ms.pnarula.com/blog/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> ब्लाग हमारे दिमाग का कूड़ा संग्रह करने का एक उत्तम स्थान है <img src='http://ms.pnarula.com/blog/wp-includes/images/smilies/icon_biggrin.gif' alt=':D' class='wp-smiley' /></p>
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	<item>
		<title>By: pankaj</title>
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		<author>pankaj</author>
		<pubDate>Mon, 10 Apr 2006 02:26:34 +0000</pubDate>
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		<description>तो मतलब यह हुआ कि आपको चुनना पड़ेगा कि आप बातचीत करना चाहते हैं या फिर कुछ भारी कहना चाहते हैं। कुछ बीच का रास्ता भी होना चाहिए।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>तो मतलब यह हुआ कि आपको चुनना पड़ेगा कि आप बातचीत करना चाहते हैं या फिर कुछ भारी कहना चाहते हैं। कुछ बीच का रास्ता भी होना चाहिए।</p>
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	<item>
		<title>By: अनूप शुक्ला</title>
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		<author>अनूप शुक्ला</author>
		<pubDate>Mon, 10 Apr 2006 02:18:50 +0000</pubDate>
		<guid>http://ms.pnarula.com/200604/%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%97-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be/#comment-4201</guid>
		<description>ब्लाग लेखन एक तरह का ड्राफ्ट लेखन है। भाषण वाले लेख पढ़ने के बाद टिप्पणी करने
के बारे में सोचना पढ़ता है। ब्लाग पर कुछ टिप्पणी लिखने के लिये सोचना नहीं पढ़ता है।
ब्लाग आपसी बातचीत की तरह अनौपचारिक मामला है।भाषण लिखने तथा पढ़ने के लिये
भी बहुत सोचना पढ़ता है।दुनिया में वैसे भी बातचीत की बहुतायत है भाषण कम दिये जाते हैं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ब्लाग लेखन एक तरह का ड्राफ्ट लेखन है। भाषण वाले लेख पढ़ने के बाद टिप्पणी करने<br />
के बारे में सोचना पढ़ता है। ब्लाग पर कुछ टिप्पणी लिखने के लिये सोचना नहीं पढ़ता है।<br />
ब्लाग आपसी बातचीत की तरह अनौपचारिक मामला है।भाषण लिखने तथा पढ़ने के लिये<br />
भी बहुत सोचना पढ़ता है।दुनिया में वैसे भी बातचीत की बहुतायत है भाषण कम दिये जाते हैं।</p>
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