कहते हैं कि मूद्रा बाजार में किसी उत्पाद की जरूरत पैदा होनी चाहिए उसको बेचने वाले जादूई तरीके से पैदा हो जाते हैं। अब अमरीका के बढ़ते हुए ऋण को ही लीजिए इसका सबसे बड़ा परिणाम क्या हो सकता है - भई डालर के गिरने की संभावना है। वारेन बफे सरीखे लोग तो इस पर करोड़ों का जूआ खेल भी चुके हैं। क्या आपके पास भी खूब सारे डालर जमा हैं और आप को भी डर लग रहा है कि गर डालर की कीमत गिरी तो क्या होगा। उदाहरण के तौर पर यदि आप के पास दस हजार हैं और डालर ४४ से ४२ पर आ जाता है तो आप का रुपयों के हिसाब से तो बीस का फटका लग गया ना। तो क्या करें चलो ऐसा करते हैं डालर इंडिया भेज देते हैं वहाँ रहेंगे तो डालर जो मर्जी करें अपुन तो सेफ हैं। पर हाय कर जरुरत पड़ेगी तो वापिस लाने में फिर पंगा।
क्या ही अच्छा हो कि आप रुपयों का फिक्सड डिपॉजिट डालरों में खरीदें और फिर अवधि समाप्त होने पर फिर डालर में वापिस मिल जाए। फर्ज कीजिए आज डालर का भाव है ४४ और आपने १००० डालर की एफ डी ५ प्रतिशत की दर पर एक साल के लिए ली। तो साल के अंत में आप को मिलेंगे ४४००० जमा २२०० यानि ४६२००। पर यदि उस समय तक डालर गिर कर ४२ पर आ चुका है तो आप को मिलेंगे ४६२०० / ४२ = ११०० यानि कि १० प्रतिशत का फायदा। पर यह बाजी उलटी भी पड़ सकती है यानि कि डालर का भाव ४४ से बढ़कर ४५ हो जाए तो आप को मिलेंगे १०२६.६ यानि ५ के बजाए २.५ की दर। तो बाजी दोनो तरफ पड़ सकती है। पर बात हो रही थी कि क्या हम डालर - रुपयों में जमा करा सकते हैं। अजी बिल्कुल जरा नीचे निगाह तो डालिए
आखिर में - भैया यह कोई निवेश करने की सलाह नहीं है। मुद्रा बाजार बहुत घटता बढ़ता रहता है व सवारी अपने सामान की खुद जिम्मेवार है यानि आपके फायदे नुक्सान की वजह मैं नहीं होउगा।
7 Responses
ई-स्वामी
अप्रैल 29th, 2006 at 2:18 pm
1Good Info!
अनिवासी निवेशक अब सीधे अपने NRE अकाउंट से उन म्यूचुअल फ़ंड्स और SIP (Systemetic investement plans) में इनवेस्ट कर सकते हैं जो अनिवासियों के लिए बनाई गई हैं आपका पैसा डालर में लिया जाता है और डालर में ही वापस किया जाता है - फ़ायदा? ये है की आप भारतीय बाजार में पूंजी लगा रहे हो और वो द्रुत गति से बढ रही है. किसी भी अमरीकी 401k में इन्वेस्ट करने से ज्यादा अच्छा रेट मिल सकता है. (ICICI/Templton/others have such shemes)
pankaj
अप्रैल 29th, 2006 at 3:41 pm
2बात तो आपकी सही है स्वामी जी। भारतीय सी डी सिर्फ एक उदाहरण था। भारतीय बाजार देख कर तो लगता है कि आजकल विदेशी निवेशकों को अपना पैसा दूगना चौगुना करने का एक और जरिया मिल गया है। पिछले एक साल में बम्बई स्टॉक एक्सचेंज दूगना हो गया है। यही हाल रशिया व ब्राजील का भी है। लगता है मार्किट में पैसा ही बहुत है। अपुन तो साइड पर बैठे हैं व सरकारी स्कीमों से ही मुद्रास्फीति से ही बच जाएं का हिसाब किताब कर रहे हैं। देखते हैं इस साल के अंत तक क्या होता है। सुना है अमरीकी मकानों के एटीएम में पैसा खत्म हो गया है
kali
अप्रैल 29th, 2006 at 5:37 pm
3In case you have closely tracked the indian market, it is mostly now speculation investment for foreign investors. Option / derivative trading abounds. have seen panic sells twice this month, 12th and 29th. Not to say it is not a good long term investment place, but the P/E is just way overpriced for everything. In short too much money chasing too few stocks. The famous 2 words “irrational exuberance” comes to mind.
pankaj
अप्रैल 29th, 2006 at 5:51 pm
4काली भैया,
पूरे एक साल पहले वेगास जाते समय डेथ वैली में मेरे एक दोस्त के साथ यह वार्ता शूरु हुई थी व उसे मेरे रजाई में पैसे छुपा कर रखने वाली नीति(सारा पैसै सेविंग अकांउट) के बारे में पता चला व उसने सर पीट लिया। वैसे रजाई नीति का प्रमुख कारण नब्बे के आखिरी सालों में पैसा डूबाना भी था। खैर दब से पढ़ना शुरु किया। पैसा निकाल कर इधर उधर रखना शुरु किया। सोचा था एक बार थोड़ा पढ़ लूँ कि मार्किट चलती कैसे है फिर स्टाक,इंडेक्स सब से मुह्ब्बत कर लेंगे। उस समय देसी मार्किट ६५०० पर थी। अब जब कि थोड़ी बैलेंस शीट पढ़नी आनी शुरु हुई है व आगे की कमाई की आज की कीमत निकालनी आई है तो मार्किट आसमान पर चढ़ी है। खैर मार्किट भी मीन रिवरटिंग मशीन है आएगी वापिस फिर देख लेंगे। अभी तो भैया बहुत गर्मी है।
पंकज
जीतू
अप्रैल 29th, 2006 at 8:38 pm
5अपना फ़न्डा तो बहुत क्लियर है:
अपनी सेविन्गस का ३०% हिस्सा इन्डियन म्यूचल फ़्न्ड मार्केट मे INR में काफ़ी इन्वेस्टमेन्ट कर रखा है। शेयर मार्केट से बहुत पहले झटका खाए थे, इसलिये दूर ही रहते है।
50% की सेविन्गस FCNR डिपाजिट मे लगा रखी है, बाकी का 20% कैश रखते है। कोई और सलाह हो तो बतायी जाए।
भारतीय म्यूचल फ़न्ड मे अच्छा स्कोप है अभी, कोई बन्धु सलाह लेना चाहे तो इमेल कर सकता है।
pankaj
अप्रैल 29th, 2006 at 9:14 pm
6जीतू जी,
सही है आप का समीकरण बढ़िया है। आदमी को सरल से नियम रखने चाहिए व फिर बस उन्हीं का पालन करना चाहिए। म्युचल फन्ड में भी आपने अलग अलग Asset Classes तो ले ही रखी होंगी। सारे अंडे एक ही टोकरी में तो नहीं रखने चाहिए न।
पंकज
जीतू
अप्रैल 29th, 2006 at 10:15 pm
7पंकज भाई,
म्यूचल फ़न्ड मे हमने Equity Diversified mein 55%, balance में 35% और बाकी का MIP/Gilt में लगा रखा है, हर इन्वेस्टमेन्ट मे NAV को देखकर ही लगाते है, इसलिये कभी कभी थोड़ा disbalance हो जाता है। लेकिन अन्डे एक ही टोकरी मे नही है।
बस फ़न्डा वही है : (Keep it Simple & Follow it)
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