शनिवार की सुबह है, और पहली खबर न्यूयार्क टाइम्स में पढ़ी की बम्बई के मशहूर डिब्बे वालों की जैसी लंच वितरण सेवा अब आमछी वैली में भी शुरु हो गई है। खबर के हिसाब से यह २००२ से चल रही है पर मुझे अभी ही पता चला। शुरु करने वाली हैं कविता श्रीवथसन। मजे की बात है जब वे यहाँ आई थी तो खाना बनाना भी नहीं जानती थी और अब पंजाबियों को उनका साग पनीर, गुजरातियों की दाल रोटी, और दक्षिण वालों के लिए रासम इन्हीं के अन्नदाता.कॉम से जाता है। आप हफ्ते का मीनू इनके सजाल से देख सकते हैं और फिर क्रेडिट कार्ड से भुगतान भी कर सकते हैं।
अन्नदाता वैली की लगभग हर जगह पर खाना पहुंचाते हैं। पर अपनी किस्मत देखिए अपने यहाँ सबसे आखिर में दोपहर के एक बजे के बाद (ब्रोका रोड) पहुंचते हैं। इतने तक तो अपने राम को बोलो राम हो जाएगा। फिर भी खबर मजेदार है।
साभार: न्यूयार्क टाइम्स
One Response
Yatish
अप्रैल 5th, 2006 at 1:04 am
1आप का कहना बिल्कुल सही है. पर उनका क्या जिनकी परिस्थिती अब सीखने की नही है.जिम्मेदारियों से घिरे है. बहुत खलता है उन्हें. पर ये सही है की केवल हिन्दी आना बेकवङ माना जाता है हिन्दोस्तान में.
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