शनिवार की सुबह है, और पहली खबर न्यूयार्क टाइम्स में पढ़ी की बम्बई के मशहूर डिब्बे वालों की जैसी लंच वितरण सेवा अब आमछी वैली में भी शुरु हो गई है। खबर के हिसाब से यह २००२ से चल रही है पर मुझे अभी ही पता चला। शुरु करने वाली हैं कविता श्रीवथसन। मजे की […]
बचपन में जब भारत एक खोज आता था तो उसके आरंभ में आने वाला गीत बड़ा सही लगता था। सुनने में अच्छा था और बोल मुंह पर चढ़ भी गए थे। यहाँ आने के बात वह गीत के बारे में याद तो था पर उस से अधिक कुछ नहीं। फिर घूमते घूमते “Hymn of Creation” […]
आज एक दोस्त से बात करते हुए एक और दोस्त राहुल का जिकर् आन पड़ा उसका ब्लॉग जाकर पढ़ना शुरु किया तो पता लगा कि भैया को गज़लों का शौक हो आया है। अब इसे छड़ेपन की निशानी माने या परिपक्वता की तो पता नहीं। पर राहुल काफी सही शेरों के बारे में लिखते हैं। […]