कहते हैं मिर्ची की तासीर गर्म होती है। मुझे भी गर्म जगह ही पसंद आती हैं। ठंडे मौसम के चलते लुईविल छोड़ कर कैलिफोर्निया गया था। जिंदगी का जागते हुए सबसे कम तापमान 14 डिग्री फारेनहाईट देखा था। पर वह रिकार्ड भी टूट गया। आजकल काम के सिलसिले में मिलवॉकी में हूँ। ठंड़ी इतनी है कि थूक फैंको तो बर्फ बनकर नीचे गिरती है। आज कार में कम्पास पर 9 डिग्री फाहरेहाइट यानि -13 डिग्री सेल्सियस देखा। फोटू देखिए। वैसे मैं अब गालिया नहीं देता। पर कॉलेज के जमानें में बिना इसके बात न होती थी। पर आज जैसे ही काम के बात स्टीयरिंग पर हाथ रखे। स्वतः मुहँ से फूल झड़ने लगे। s#!t f@#k का ऐसा तांता लगा कि जब नोटिस किया तो हंसी आई कि मिर्ची की एक्सट्रीम वेदर में हालत क्या हो गई है।
4 Responses
रवि
दिसम्बर 5th, 2005 at 11:36 pm
1#$^&@ मैं अपने ब्राउज़र को बाइ डिफ़ॉल्ट चित्र प्रदर्शित न करने के लिए सेट कर रखता हूँ, ताकि बहुत सी झंझटों, और खासकर धीमी गति से मुक्ति मिल सके.
आपने कहा चित्र देखिए. जनाब उम्मीद यह थी कि आप कोई बर्फीले मौसम का बढ़िया चित्र दिखाएँगे.
पर यहाँ तो आप थर्मामीटर का पारा दिखा रहे हैं - वह भी कोई दिखाने की चीज़ है? हमने पहले ही मान लिया था 9 डिग्री होगा, 7 डिग्री भी हो सकता है.
दरअसल, देखना चाहते थे आपका थूक या जमी हुई गा@#!$^लियाँ.. वो दिखाओ तो कुछ बात बने…
Vivek
दिसम्बर 6th, 2005 at 7:50 am
2Given that phool angrezi mein jhare they, I assume it was not the worst you can see, warna mausam ka abhinandan martibhasha mein hota.

Wish you luck….
जीतू
दिसम्बर 7th, 2005 at 8:17 am
3अमां फ़िर थूक मत फ़ेंको, बेकार मे बर्फ़ के ढेर मे और बर्फ़ डालने से क्या फ़ायदा? आसपास कंही रम का इन्तजाम हो तो बनाओ दो पटियाला पैग, एक अपने नाम का पियो, दूसरा हमारे नाम का, अरे रुको देबू दादा बोल रहे है, हमारे नाम की बोतल पी लेना।
महावीर शर्मा
दिसम्बर 10th, 2005 at 4:39 pm
4तुम्हारी थूक की दुर्घटना सुन कर हमें भी १९६५ की याद आगई। लन्दन में बड़ी ठण्ड थी। हमारे होंठों के ऊपर करारेदार मूंछें थीं। बाहर जाते ही
दो मिनट में मूंछें जम कर बर्फ की तलवार सी बन गई। ताव से एक
तरफ उंगलियों का मरोड़ा लगाया सो आधी मूंछ हाथ में और आधी होंट
के ऊपर! भाग कर लौटे और दूसरी को पिघला कर रेज़र से साफ करदी।
बस उस दिन का दिन है और आज का दिन, मूंछ को उगने ही नहीं देते।
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