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	<title>Comments on: शादी की उमर</title>
	<link>http://ms.pnarula.com/200511/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%ae%e0%a4%b0/</link>
	<description>मिर्ची सी जिंदगी, कभी मंदी कभी तेज</description>
	<pubDate>Sat, 17 May 2008 06:23:22 +0000</pubDate>
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		<title>By: अनूप शुक्ला</title>
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		<author>अनूप शुक्ला</author>
		<pubDate>Mon, 14 Nov 2005 18:44:12 +0000</pubDate>
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		<description>सेठजी, सच तो यह है कि हम अपने तमाम स्वत:स्फूर्त मनोभाव 
स्थगित करते रहते हैं। बेटा पढ़ लो तब खेलना। नौकरी लग जाये तब
मस्ती करना। कमा लो अच्छी तरह तब शादी करना। कुछ दिन ऐश
कर लें तब बच्चे। अभी आफिस में हैं इसलिये हंसनही पा रहे हैं। घर में
हैं इसलिये रो नहीं पा रहे हैं। अभी काम बहुत है इसलिये लिखनहीं पा
रहे हैं। फुरसत में हैं इसलिये कुछ सोच नहीं पा रहे हैं। आदि-इत्यादि। वगैरह-वगैरह।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सेठजी, सच तो यह है कि हम अपने तमाम स्वत:स्फूर्त मनोभाव<br />
स्थगित करते रहते हैं। बेटा पढ़ लो तब खेलना। नौकरी लग जाये तब<br />
मस्ती करना। कमा लो अच्छी तरह तब शादी करना। कुछ दिन ऐश<br />
कर लें तब बच्चे। अभी आफिस में हैं इसलिये हंसनही पा रहे हैं। घर में<br />
हैं इसलिये रो नहीं पा रहे हैं। अभी काम बहुत है इसलिये लिखनहीं पा<br />
रहे हैं। फुरसत में हैं इसलिये कुछ सोच नहीं पा रहे हैं। आदि-इत्यादि। वगैरह-वगैरह।</p>
]]></content:encoded>
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