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	<title>Comments on: आप्रवासी मन का चैन</title>
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	<description>मिर्ची सी जिंदगी, कभी मंदी कभी तेज</description>
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		<title>By: Brij</title>
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		<dc:creator>Brij</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Dec 2005 18:50:44 +0000</pubDate>
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		<description>Well written, frequent trips to country can lessen the pain (if I am using the right word !)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Well written, frequent trips to country can lessen the pain (if I am using the right word !)</p>
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		<title>By: आलोक कुमार</title>
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		<dc:creator>आलोक कुमार</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Nov 2005 06:13:03 +0000</pubDate>
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		<description>मुझे लगता है कि किसी चीज़ को तो बलि चढ़ना ही होगी। अङ्ग्रेज़ लोगों ने पूरी दुनिया पर राज किया, तो यह तो नहीं सोचा कि उनके परिवार वाले कैसे हैं और क्या कर रहे हैं।

हिमाचल वगैरह में आदमी लोग मैदानों में काम करने जाते ही हैं, परिवार को छोड़ के।

मुझे बङ्गलोर में रह के भी लगता है कि घर वालों के लिए कुछ नहीं कर पा रहा, जो कि दिल्ली, लखनऊ या फिर हैदराबाद में हैं।

मुझे नहीं लगता कि देसी प्रोग्रामरों के लिए हिन्दुस्तान में पैसे की कमी होगी। हाँ, उतना तो नहीं होगा जितना अमेरिका में, लेकिन दूसरे फ़ायदे हैं।

हाँ ये बात ज़रूर खटक सकती है कि अगली पीढ़ी क्या होगी, क्या करेगी? लेकिन हरेक पीढ़ी के अपने रास्ते होते हैं, कुछ लोग भारत में रह के भी विदेशी समान हैं।

भाषा, वेशभूषा और लहज़े के आवरण से परे हो कर विचारना वाञ्छनीय है।

इतना निश्चित है कि सब कुछ नहीं मिल सकता। क्या छोड़ें और क्या रखें, यह निर्णय वास्तव में आपके हाथ में है। जी हाँ, है। इस बात को ध्यान में रखें।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मुझे लगता है कि किसी चीज़ को तो बलि चढ़ना ही होगी। अङ्ग्रेज़ लोगों ने पूरी दुनिया पर राज किया, तो यह तो नहीं सोचा कि उनके परिवार वाले कैसे हैं और क्या कर रहे हैं।</p>
<p>हिमाचल वगैरह में आदमी लोग मैदानों में काम करने जाते ही हैं, परिवार को छोड़ के।</p>
<p>मुझे बङ्गलोर में रह के भी लगता है कि घर वालों के लिए कुछ नहीं कर पा रहा, जो कि दिल्ली, लखनऊ या फिर हैदराबाद में हैं।</p>
<p>मुझे नहीं लगता कि देसी प्रोग्रामरों के लिए हिन्दुस्तान में पैसे की कमी होगी। हाँ, उतना तो नहीं होगा जितना अमेरिका में, लेकिन दूसरे फ़ायदे हैं।</p>
<p>हाँ ये बात ज़रूर खटक सकती है कि अगली पीढ़ी क्या होगी, क्या करेगी? लेकिन हरेक पीढ़ी के अपने रास्ते होते हैं, कुछ लोग भारत में रह के भी विदेशी समान हैं।</p>
<p>भाषा, वेशभूषा और लहज़े के आवरण से परे हो कर विचारना वाञ्छनीय है।</p>
<p>इतना निश्चित है कि सब कुछ नहीं मिल सकता। क्या छोड़ें और क्या रखें, यह निर्णय वास्तव में आपके हाथ में है। जी हाँ, है। इस बात को ध्यान में रखें।</p>
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		<title>By: pankaj</title>
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		<dc:creator>pankaj</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Nov 2005 04:54:06 +0000</pubDate>
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		<description>जीतू जी: इस तरह से तो मुझे शिकायत करना भी नहीं बनता। यहाँ सिलकन वैली में इतने भारतीय हैं कि कई बार अमरीकी विदेशी लगने लगते हैं। पर आप जानते हैं कि पर तो होगा। होली दिवाली पर जो बाजारों के रंग बदल जाते हैं वे यहाँ कहाँ। दूसरा यहाँ रहते हुए जो बुरा लगा अभी बड़े भैया कि आँख में कुछ तकलीफ थी व एक छोटा सा आपरेशन हुआ जो कि भगवान व डॉक्टर की कृपा से सफल रहा। इस पूरी अवधि के दौरान बुरा लगा कि जब अपने तकलीफ में हैं तो आप वहाँ पहुँच नहीं सकते।

सुनील जी आपकी प्रविष्टि का इंतजार रहेगा।

धरणी जी आपकी बात में दम है जरा तफसील से लिखिए चिट्ठे पर हो सकता है दो चार वही पढ़के प्रेरणा पा लें।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जीतू जी: इस तरह से तो मुझे शिकायत करना भी नहीं बनता। यहाँ सिलकन वैली में इतने भारतीय हैं कि कई बार अमरीकी विदेशी लगने लगते हैं। पर आप जानते हैं कि पर तो होगा। होली दिवाली पर जो बाजारों के रंग बदल जाते हैं वे यहाँ कहाँ। दूसरा यहाँ रहते हुए जो बुरा लगा अभी बड़े भैया कि आँख में कुछ तकलीफ थी व एक छोटा सा आपरेशन हुआ जो कि भगवान व डॉक्टर की कृपा से सफल रहा। इस पूरी अवधि के दौरान बुरा लगा कि जब अपने तकलीफ में हैं तो आप वहाँ पहुँच नहीं सकते।</p>
<p>सुनील जी आपकी प्रविष्टि का इंतजार रहेगा।</p>
<p>धरणी जी आपकी बात में दम है जरा तफसील से लिखिए चिट्ठे पर हो सकता है दो चार वही पढ़के प्रेरणा पा लें।</p>
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		<title>By: धरणी धर द्विवेदी</title>
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		<dc:creator>धरणी धर द्विवेदी</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Nov 2005 18:41:45 +0000</pubDate>
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		<description>भैया काहे को इमोशनल करते हो। अभी कुछ महीने पहले ही तो भारत से वापस आया हूं। सच लिखा है कि देश में रह कर देश की सेवा हो सकती थी...और जहां तक पैसे का सवाल है...मेरा रियल लाइफ एक्स्पीरिएंस मानो कि भारत में भी बहुत पैसा है...सिर्फ सॉफ्ट्वेयर में ही नहीं, अन्य क्षेत्रों में भी। अमेरिका की अपेक्षा पैसे की बचत भी अधिक अनुपात में होती है। थोड़ा व्यवस्था के सुधरने की देर है..वरना अब तो वहां भी सब कुछ हो गया है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भैया काहे को इमोशनल करते हो। अभी कुछ महीने पहले ही तो भारत से वापस आया हूं। सच लिखा है कि देश में रह कर देश की सेवा हो सकती थी&#8230;और जहां तक पैसे का सवाल है&#8230;मेरा रियल लाइफ एक्स्पीरिएंस मानो कि भारत में भी बहुत पैसा है&#8230;सिर्फ सॉफ्ट्वेयर में ही नहीं, अन्य क्षेत्रों में भी। अमेरिका की अपेक्षा पैसे की बचत भी अधिक अनुपात में होती है। थोड़ा व्यवस्था के सुधरने की देर है..वरना अब तो वहां भी सब कुछ हो गया है।</p>
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		<title>By: जीतू</title>
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		<dc:creator>जीतू</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Nov 2005 10:07:36 +0000</pubDate>
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		<description>सच है और परिवार की याद तीज त्योहार पर सबसे ज्यादा आती है।
भैया, अपन तो कुवैत मे रम गये है। पूरी की पूरी दुनिया बसा डाली है यहाँ।यहाँ पर इन्डियन कम्यूनिटी बहुत ज्यादा एक्टिव है, हम लोग हर त्योहार बड़े जोशोखरोश से मनाते है, इवेन वो वाले त्योहार भी जो, भारत मे कभी नही मनाते थे। लेकिन जब मन ज्यादा उदास हो जाता है, तो उठाते है टीमटामड़ा और मुँह उठाकर निकल पड़ते है हिन्दुस्तान की ओर।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सच है और परिवार की याद तीज त्योहार पर सबसे ज्यादा आती है।<br />
भैया, अपन तो कुवैत मे रम गये है। पूरी की पूरी दुनिया बसा डाली है यहाँ।यहाँ पर इन्डियन कम्यूनिटी बहुत ज्यादा एक्टिव है, हम लोग हर त्योहार बड़े जोशोखरोश से मनाते है, इवेन वो वाले त्योहार भी जो, भारत मे कभी नही मनाते थे। लेकिन जब मन ज्यादा उदास हो जाता है, तो उठाते है टीमटामड़ा और मुँह उठाकर निकल पड़ते है हिन्दुस्तान की ओर।</p>
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		<title>By: सुनील</title>
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		<dc:creator>सुनील</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Nov 2005 09:44:12 +0000</pubDate>
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		<description>पंकज जी बात तो बिल्कुल सही उठायी है, किसी भी क्षेत्र में हों हम, अक्सर यह सवाल तो मन में अवश्य उठता होगा पर उत्तर लिखने के लिए तो पूरा चिट्या लिखना पड़ेगा.
सुनील</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पंकज जी बात तो बिल्कुल सही उठायी है, किसी भी क्षेत्र में हों हम, अक्सर यह सवाल तो मन में अवश्य उठता होगा पर उत्तर लिखने के लिए तो पूरा चिट्या लिखना पड़ेगा.<br />
सुनील</p>
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